रिटायरमेंट पर बोले DG अनिल कुमार रतूड़ी कहा- फिल्म ‘अर्द्धसत्य’ से मिली पुलिस में जाने की प्रेरणा

देहरादून : उत्तराखंड के डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी सोमवार को रिटायर हो रहे हैं। उनकी विदाई के लिए शानदार रैतिक परेड का आयोजन किया गया। पुलिस लाइन में आयोजित परेड के दौरान उन्होंने सलामी ली। इसके साथ ही अशोक कुमार आज सूबे के नए डीजीपी का कार्यभार ग्रहण करेंगे।
पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित परेड का नेतृत्व एएसपी सुश्री रेखा यादव ने द्वितीय कमाण्ड शेखर सुयाल, पुलिस उपाधीक्षक, नगर व परेड एडज्यूटेन्ट सुश्री पल्लवी त्यागी, पुलिस उपाधीक्षक, नेहरू कालोनी देहरादून के साथ किया। परेड में उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न शाखाओं, ट्रैफिक पुलिस, नागरिक पुलिस, पीएसी, महिला पीएसी, कमाण्डो दस्ता, तथा एटीएस आदि सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन उप निरीक्षक सुश्री पूनम प्रजापति एवं आरक्षी फायर मनीष पंत द्वारा किया गया। रैतिक परेड का पुलिस महानिदेशक द्वारा मानप्रणाम ग्रहण करने के उपरांत परेड का निरीक्षण किया गया।
इस अवसर पर डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि यह भव्य और शानदार परेड और आप लोगों के भाव को देखकर मैं अभिभूत हूं। मैं आपके द्वारा इस शानदार परेड के जरिये जो आपका भाव है उससे अभिभूत हूं और परेड के जरिये जो इस वर्दी में सम्मान दिया जाता है, उसके सामने अपने आप को बहुत छोटा महसूस कर रहा हूं। मैं इस परेड में सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद तथा शुभकामनाएं देना चाहता हूं। आज के इस शानदार आयोजन के लिए इस भव्य आयोजन के पीछे समस्त टीम को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। जिन्होंने इतने स्नेह से इसको तैयार किया।
उन्होंने कहा कि एक लम्बी सेवा अन्तराल के पश्चात विभिन्न जगहों में काम करने के बाद आज मैं केवल यहीं कह सकता हूं कि जो भी हम कर पाये वो एक टीम के आधार पर कर पाये। आज इस अवसर पर मैं विशेष तौर से जब से मैं ओएसडी उत्तराखंड आया, अगस्त 2000 से और आज 30 नवम्बर, 2020 को सौभाग्य से मैं पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत हो रहा हूं। उस पद पर रहते हुए मुझे खासतौर से उत्तराखंड पुलिस को बहुत नजदीकी से देखने का अवसर मिला। मैं यह कह सकता हूं कि हमारे खासतौर से जो सिपाही हैं, वो देश के बहुत ही विवेकशील, अनुशासित, कर्मठ सिपाहियों में गिने जायेंगे। मैं आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। कोरोना के कारण मार्च के आखिरी सप्ताह के हमारे देश में लॉकडाउन हुआ। विश्वव्यापी ये एक अभूतपूर्ण किस्म की चुनौती थी, जिसके बारे में किसी को कोई समझ तक नहीं थी कि क्या किया जाये। ऐसी परिस्थिति में हमारे समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस प्रकार से निडर होकर जनसेवा में अपनी जान को भी जोखिम में डाला।
डीजीपी (अपराध एवं कानून व्यवस्था) तथा उनके उत्तराधिकारी अशोक कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आज हम सबने उत्तराखंड पुलिस की ओर से पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी को उनका सेवाकाल पूर्ण होने पर भावभीनी विदाई देने के लिए उनके लिए इस भव्य परेड का आयोजन किया है। 24 अगस्त, 1987 को उन्होने भारतीय पुलिस सेवा कदम रखा। उन्होने राज्य पुलिस में विभिन्न पदों पर रहते हुए बेहतरीन सेवा की। उनका उम्दा पुलिस रिकार्ड रहा, जिसके लिए समय-समय पर उन्हें विशिष्ट सम्मानों से नवाजा गया। उत्तराखंड पुलिस की स्थापना एवं विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। कई नए ऐप लांच किए गए। इनमें एपीवी, एडीटीएफ, ऑपरेशन मुक्ति और ई सुरक्षा चक्र, पहली बार देश के 15000 से अधिक थानों में, उत्तराखंड पुलिस के 3 थाने, देश के टॉप 10 में उत्कृष्ट रहे। चतुर्थ श्रेणी से पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी व कर्मचारी की अधिवर्षता आयु पूर्ण होने पर प्रशस्ति पत्र दिये जाने की व्यवस्था की गई। उनके डीजीपी के कार्यकाल में उनके सेकेंड इंचार्ज के रूप में मैने उनसे बहुत कुछ सीखा है। मै प्रयास करूंगा कि उनके सभी कार्यों को और आगे बढाऊं। मेरा यह भी प्रयास रहेगा हम सब मिलकर उनके पद चिह्नों पर चल कर उत्तराखंड पुलिस को नयी ऊंचाई पर ले जाएं।
इस अवसर पर डीजीपी रतूड़ी ने पुलिस मुख्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल नागरिक पुलिस विनोद प्रकाश डबराल को सराहनीय एवं उत्कृष्ट सेवा हेतु तथा 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार में तैनात हेड कांस्टेबल सुषमा रानी को मानवाधिकार वाद विवाद प्रतियोगिता में राज्य में प्रथम स्थान तथा राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर स्मृति चिह्न भेंट किया।

 

Related Articles

Back to top button