‘मैंने गड़बड़ियां उजागर कीं, मुझे ही फंसाया जा रहा’ पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल का बड़ा आरोप

JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल का पलटवार, जांच को बताया चयनात्मक ‘मेरे पहले हुई मंजूरियां, मैंने ही ठेके रद्द किए’ पूर्व ACS का दावा गिरफ्तारी के बीच निष्पक्ष जांच की मांग, परिवार पर भी पड़ा असर

JJM घोटाला: राजस्थान के जल जीवन मिशन (JJM) टेंडर मामले में गिरफ्तार पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (PHED) Subodh Agarwal ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर अब बड़ा और सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने एसीबी की एफआईआर को “मनमाना”, “दुर्भावनापूर्ण” और “चयनात्मक” बताते हुए दावा किया है कि उन्हें एक सुनियोजित तरीके से फंसाया जा रहा है। अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में राजस्थान के मौजूदा मुख्य सचिव Sudhansh Pant की भूमिका संदिग्ध है और उन्हीं के इशारे पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और व्यापक जांच करने के बजाय सिर्फ उनके कार्यकाल को टारगेट किया है।

‘मेरे पहले ही हो चुकी थीं मंजूरियां, मुझे बनाया गया निशाना’

अग्रवाल ने कहा कि जिन टेंडरों को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, उनमें से अधिकतर उनके कार्यकाल से पहले ही मंजूर हो चुके थे। उनके मुताबिक 2021 से 2023 के बीच जारी 104 वर्क ऑर्डर में से 67 छोटे टेंडर वरिष्ठ इंजीनियर स्तर पर पास हुए, जबकि बड़े टेंडरों की मंजूरी भी पहले के अधिकारियों के समय में दी गई थी। इसके बावजूद जांच का फोकस सिर्फ 2023 में मंजूर चार टेंडरों और उनके कार्यकाल पर रखा गया है, जो “चयनात्मक जांच” को दर्शाता है। उनका कहना है कि अगर पूरी फाइल खोली जाए, तो कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होगी, लेकिन फिलहाल उन्हें अकेले घेरा जा रहा है।

JJM घोटाला: ‘मैंने गड़बड़ियां रोकीं, जांच बैठाई और ठेके रद्द किए’

अपने बचाव में अग्रवाल ने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल (18 अप्रैल 2022 से 12 जनवरी 2024) के दौरान अनियमितताओं को बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि उन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाए। उन्होंने 21 मार्च 2023 को वित्त समिति की बैठक में ऊंची दरों के चलते बोलियों को मंजूरी देने से इनकार किया और पुनर्विचार के लिए भेजा। इसके बाद कंपनियों की क्षमता की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए। 7 जून 2023 को IRCON International Limited से जुड़े फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों की शिकायत मिलने पर जांच समिति बनाई गई और भुगतान व कार्य आदेशों पर रोक लगा दी गई। बाद में 104 ठेके रद्द करने और फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

JJM घोटाला: ‘जांच एजेंसियां सच्चाई छिपा रही हैं’

अग्रवाल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीकी पात्रता की जांच Bid Evaluation Committee की जिम्मेदारी होती है, जबकि वित्त समिति तकनीकी रिपोर्ट पर भरोसा करती है। इसके बावजूद उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ही मामले में दोबारा FIR दर्ज करना सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उनके अनुसार फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल 2021 से हो रहा था, लेकिन जांच एजेंसियों ने इस पहलू को नजरअंदाज कर दिया।

गिरफ्तारी के बीच परिवार पर असर, निष्पक्ष जांच की मांग

JJM घोटाला: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मल्टी-स्टेट ऑपरेशन के बाद उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर इसे बड़ी सफलता बताया है, लेकिन अग्रवाल खुद को “बलि का बकरा” बता रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो, ताकि असली जिम्मेदारों की पहचान हो सके। इस विवाद का असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ा है गिरफ्तारी के बीच उनकी सास का निधन हो गया, जिसे परिवार ने सदमे से जुड़ा बताया है। अब यह मामला सिर्फ एक टेंडर विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और निष्पक्ष जांच पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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