वृंदावन हादसे ने खोली बदइंतजामी की पोल, तीर्थों में सुरक्षा पर बड़े सवाल
वृंदावन हादसे के बाद तीर्थ व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल भीड़, गंदगी और अवैध नाव संचालन से बढ़ रहा खतरा श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सिस्टम की लापरवाही उजागर

Up news: वृंदावन में शुक्रवार को हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पूरे ब्रज क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 तीर्थ यात्रियों की मौत के बाद यह साफ हो गया है कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद यहां सुरक्षा, प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन न तो भीड़ को नियंत्रित करने की कोई ठोस व्यवस्था है और न ही आपातकालीन हालात से निपटने की तैयारी। ऐसे में आस्था के इस बड़े केंद्र में हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
अव्यवस्था और जाम बना बड़ा संकट
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता अव्यवस्था और लापरवाही का वह जाल है, जो मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों में आम हो चुका है। सड़कों पर ऑटो, ई-रिक्शा और अवैध पार्किंग का कब्जा है, जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। हालात इतने खराब हैं कि एंबुलेंस तक समय पर नहीं निकल पाती और कई मामलों में मरीजों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। तीर्थों में रहने वाले स्थानीय लोगों का जीवन भी इस अव्यवस्था के कारण दूभर हो चुका है, लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नजर नहीं आता।
Up news: तीर्थ विकास परिषद पर उठते सवाल
व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए बनाए गए ब्रज तीर्थ विकास परिषद की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। परिषद के गठन के बावजूद जमीन पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता। गंदगी, खुली नालियां, सड़कों पर कीचड़ और बंदरों का आतंक यहां की पहचान बन चुके हैं। आरोप यह भी हैं कि ऐसे बोर्ड सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जहां रिटायर्ड अधिकारियों को तैनात कर दिया जाता है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए जाते।
Up news: यमुना में नाव संचालन बना बड़ा खतरा
हादसे के पीछे एक और बड़ा मुद्दा यमुना नदी में चलने वाली नावों का अनियंत्रित संचालन भी है। जानकारी के मुताबिक कई नावें बिना लाइसेंस के चल रही हैं, जिनका कोई पंजीकरण नहीं है और न ही किराया तय है। श्रद्धालुओं से मनमाने पैसे वसूले जाते हैं एक घंटे के लिए हजारों रुपये तक लिए जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हादसे में शामिल नाव को एक नाबालिग, करीब 16 साल का लड़का चला रहा था, जो सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।
जनप्रतिनिधियों और सिस्टम पर सवाल
Up news: इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, खासकर मथुरा से सांसद हेमा मालिनी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। अयोध्या, काशी, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे अन्य तीर्थ स्थलों पर भी इसी तरह की अव्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद सिस्टम का नहीं जागना सबसे बड़ा सवाल है क्या इस बार कोई ठोस बदलाव होगा या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
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