आसमान में उडान भरता उत्तराखण्ड का सपना
क्या 'हपिडा स्काईनेक्स' बदल देगा परिवहन का भविष्य ?

नवाचार : अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने तैयार किया व्यक्तिगत उड़ान वाहन ‘हपिडा स्काईट्नेक्स’
यदि कोई यह बताए कि उत्तराखंड के एक दूरस्थ पर्वतीय गांव का एक युवा नवोन्मेधी सोच और स्वदेशी तकनीक के सहारे ऐसा व्यक्तिगत उड़ान वाहन तैयार कर रहा है, जो लोगों को सड़कों की सीमाओं से मुक्त कर सीधे आकाश मार्ग से उनके गंतव्य तक पहुंचा सके, तो यह सुनकर किसी साइंस फिक्शन कथा का आभास हो सकता है। किंतु यह विचार अब केवल कल्पना नहीं रह गया है, बल्कि वास्तविकता का रूप लेने लगा है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के निवासी युवा इनोवेटर रवि टम्टा और उनकी कंपनी हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड ने अपने व्यक्तिगत उड़ान वाहन ‘हपिडा स्काईनेक्स’ के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण कर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है।
हाल ही में 7 अगस्त 2026 को हुए परीक्षण के दौरान यह वाहन जमीन से सफलतापूर्वक ऊपर उठा और लगभग एक मिनट तक हवा में रहा। यद्यपि यह अभी प्रारंभिक चरण का प्रोटोटाइप है, फिर भी इस उपलब्धि ने यह संकेत दे दिया है कि भारत में व्यक्तिगत हवाई परिवहन का सपना अब उतना दूर नहीं रह गया है।
एक गांव से नवाचार की उड़ान
रवि टम्टा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के धौलादेवी विकासखंड स्थित काफलीखान गांव के निवासी हैं। वे हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ हैं। रवि का बचपन तकनीकी वातावरण में बीता उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं। रवि ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में प्राप्त की तथा नैनीताल परिसर से बी.ए. की डिग्री हासिल की। उन्होंने विज्ञान विषय से औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन स्वाध्याय और तकनीकी प्रयोगों के बल पर अनेक नवाचार किए।
क्या है हपिडा स्काईनेक्स?
हपिडा स्काईनेक्स एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (EVTOL) वाहन है। यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधे जमीन से ऊपर उठ सकता है और बिना किसी रनवे के वापस नीचे उतर सकता है। वर्तमान प्रोटोटाइप एक सिंगल-सीटर मॉडल है और पूरी तरह विद्युत ऊर्जा से संचालित होता है।
ड्रोन और हेलीकॉप्टर का संगम
यह वाहन उन्नत मल्टी-रोटर ड्रोन प्रणाली पर आधारित है। कई शक्तिशाली प्रोपेलर वाहन को स्थिरता और नियंत्रण प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह तकनीक ड्रोन की सरलता और हेलीकॉपटर जैसी उड़ान क्षमता का अनोखा मिश्रण है।
पहाड़ों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय रास्तों में यात्रा अक्सर समय लेने वाली और कठिन होती है। घुमावदार सड़कों, भूस्खलन और मौसम की चुनौतियों के कारण छोटी दूरी तय करने में भी लंबा समय लग सकता है। यह वाहन ऐसे क्षेत्रों में परिवहन की तस्वीर बदल सकता है। जानकारी के अनुसार, जो दूरी सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटे में तय होती है, उसे यह वाहन संभावित रूप से 10 से 15 मिनट में पूरा कर सकता है।
सुरक्षा के मोर्चे पर तैयारी
हपिडा स्काईनेक्स में सुरक्षा को सवर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें आठ प्रोपेलर लगे हैं। यदि इनमें से कोई एक प्रोपेलर उड़ान के दौरान काम करना बंद कर दे, तब भी वाहन सुरक्षित रूप से नीचे उतर सकता है। इसके अतिरिस्त इसमें बैलिस्टिक पैराशूट प्रणाली भी प्रस्तावित है, जो किसी गंभीर तकनीकी खराबी की स्थिति में वाहन को नियंत्रित ढंग से जमीन पर लाने में सहायता कर सकती है। इसमें ऑटोपायलट और मैनुअल नियंत्रग दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
एक नजर में हपिडा स्काईनेक्स
प्रकारः इलेक्ट्रिक EVTOL (वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग)
सीट क्षमताः 1 व्यक्ति
ऊर्जा स्रोतः पूरी तरह विद्युत
टेक-ऑफ/लैंडिंगः बिना रनवे, सीधे जमीन से
प्रोपेलरः 8 (बहु-रोटर प्रणाली)
विशेषताएँ: ऑटोपायलट, बैलिस्टिक पैराशूट (प्रस्तावित), मैनुअल कंट्रोल विकल्प
उपयोगः व्यक्तिगत परिवहन,
चिकित्सा आपातकाल, आपदा राहत, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच
अभी लंबा है सफर
फिलहाल यह केवल एक प्रोटोटाइप है और व्यावसाथिक उपयोग से पहले कई चरणों की परीक्षण, प्रमाणन और सरकारी अनुमतियों आवश्यक होंगी। तकनीकी सुधार, बैटरी क्षमता, उड़ान दूरी और भार वहन क्षमता जैसे पहलुओं पर अभी और काम करना है।
फिर भी, रवि टम्टा और हपिडा स्काई की यह पहल भारत में व्यक्तिगत हवाई परिवहन के नए युग की शुरुआत है।
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डॉ. शुभ्रता मिश्रा, वास्को-द-गामा (गोवा) विज्ञान लेखिका/विज्ञान संचारक और कवयित्री हैं। आपकी चर्चित पुस्तक ‘भारतीय अंटार्कटिक संभारतंत्र’ को राजभाषा विभाग के राजीव गांधी ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।



