तमिलनाडु में हिंदी थोपने पर फिर गरमाई सियासत, सीएम स्टालिन का केंद्र को दो-टूक संदेश
भाषा शहीद दिवस पर सीएम स्टालिन का केंद्र सरकार को कड़ा संदेश हिंदी थोपने के खिलाफ तमिलनाडु के रुख को दोहराया NEP 2020 को लेकर DMK का लगातार विरोध

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने रविवार को ‘भाषा शहीद दिवस’ के मौके पर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने की न पहले कोई जगह थी, न आज है और न भविष्य में कभी होगी।
“न तब जगह थी, न अब है, न कभी होगी”
मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि तमिलनाडु अपनी भाषाई पहचान से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने 1965 के ऐतिहासिक हिंदी-विरोधी आंदोलन से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें आंदोलन के संघर्ष और DMK के वरिष्ठ नेताओं सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि की भूमिका को दिखाया गया है।
भाषा शहीदों को दी श्रद्धांजलि
सीएम स्टालिन ने चेन्नई में भाषा शहीद थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर इन दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन के जरिए न सिर्फ अपनी भाषा, बल्कि पूरे देश में भाषाई विविधता और अधिकारों की रक्षा की है।
क्या है ‘भाषा शहीद दिवस’?
‘भाषा शहीद’ उन युवाओं को कहा जाता है जिन्होंने 1964-65 के दौरान हिंदी को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाए जाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। उस दौर में तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन हुआ था, जिसके बाद राज्य ने दो-भाषा सूत्र अपनाया जिसमें तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई।
NEP 2020 को लेकर केंद्र पर आरोप
DMK सरकार लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध करती रही है। पार्टी का आरोप है कि इस नीति के जरिए केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। सीएम स्टालिन ने कहा, “हम अपनी भाषा से उतना ही प्रेम करते हैं, जितना अपने जीवन से। जब-जब इसे दबाने की कोशिश होगी, हमारा विरोध और मजबूत होगा।”



