राज्य संग्रहालय भोपाल में हुआ ‘स्पंदन सम्मान समारोह 2026’ का भव्य आयोजन
भोपाल के राज्य संग्रहालय में दो दिवसीय ‘स्पंदन सम्मान समारोह 2026’ का गरिमामय समापन। देशभर के साहित्यकारों, आलोचकों, पत्रकारों और कलाकारों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। रचना-पाठ सत्र ने समारोह को संवेदना, विचार और सृजन की गहराई से जोड़ा।

भोपाल, 22 फरवरी। राज्य संग्रहालय भोपाल में 21–22 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय ‘स्पंदन सम्मान समारोह 2026’ का दूसरा सत्र सम्मान वितरण के साथ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान साहित्य और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देशभर के रचनाकारों, आलोचकों, साहित्य पत्रकारों और कलाकारों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया। समारोह में साहित्यिक ऊर्जा, सांस्कृतिक गरिमा और सृजनात्मक प्रतिबद्धता का समन्वित रूप देखने को मिला।
अध्यक्षता और मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे ने की तथा मंच संचालन विनय उपाध्याय ने प्रभावी ढंग से किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उपन्यासकार गोविंद मिश्र की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य समय का साक्षी और समाज का पथप्रदर्शक दोनों होता है। चुनौतियों के हर दौर में साहित्य ने अपनी सृजनात्मक ऊर्जा से समाज को दिशा दी है और आगे भी देता रहेगा।
कथा शिखर और कृति सम्मान
समारोह में डॉ सूर्यबाला, चंद्रकांता और अशोक अग्रवाल को ‘स्पंदन कथा शिखर सम्मान’ से अलंकृत किया गया। वहीं समकालीन लेखन के लिए जितेंद्र श्रीवास्तव, विवेक मिश्र, डॉ रूपा सिंह, विवेक चतुर्वेदी, गीताश्री, मनीष वैद्य और विमलेश त्रिपाठी को ‘स्पंदन कृति सम्मान’ प्रदान किया गया।
पत्रकारिता और आलोचना सम्मान
साहित्य पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनंत विजय, जयप्रकाश पांडे और संजीव पालीवाल को ‘स्पंदन साहित्य पत्रकारिता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं आलोचना के क्षेत्र में गंभीर और सतत कार्य के लिए सुभाष राय, डॉ अरुण होता और प्रज्ञा को ‘स्पंदन आलोचना सम्मान’ प्रदान किया गया।
युवा पुरस्कार और ललित कला सम्मान
युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हुए अंजुम शर्मा, विशाल पांडे और वियोगिनी ठाकुर को ‘स्पंदन युवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। ललित कला के अंतर्गत कथक नृत्य के लिए रचना यादव तथा नाट्य मंचन और फिल्म क्षेत्र में योगदान हेतु विभा रानी को ‘स्पंदन ललित कला सम्मान’ प्रदान किया गया। आयोजक डॉ उर्मिला शिरीष ने कहा कि ‘स्पंदन’ उनके लिए केवल संस्था नहीं, बल्कि संस्कारों से पोषित एक सृजनात्मक परिवार है।
रचना-पाठ सत्र की साहित्यिक पृष्ठभूमि
पहले दिन आयोजित रचना-पाठ सत्र ने पूरे समारोह की साहित्यिक आधारभूमि तैयार की। सत्र की शुरुआत चित्रा सिंह की पंक्तियों से हुई, जिसने स्त्री-अस्मिता की ऊर्जा को स्वर दिया। सुमन सिंह, सुजाता शिवेन, सविता भार्गव, हरि भटनागर, संगीता गुंदेचा, बलराम गुमास्ता, शरद सिंह, प्रेम शंकर शुक्ल और मुकेश वर्मा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से संवेदना, सामाजिक यथार्थ और पारिवारिक संबंधों की विविध परतों को प्रस्तुत किया। इस सत्र ने आयोजन को गंभीर साहित्यिक संदर्भ प्रदान करते हुए भोपाल की सांस्कृतिक भूमि को और समृद्ध किया।



