भारत ने थाईलैंड-कंबोडिया सीमा झड़प में प्रीह विहियर मंदिर को हुए नुकसान पर जताई गहरी चिंता
भारत ने प्रीह विहियर मंदिर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर बढ़ती गोलीबारी से हालात फिर तनावपूर्ण यूनेस्को भी चिंतित, दोनों देशों से शांति और संयम की अपील

भारत ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हालिया सीमा झड़प के दौरान 1100 साल पुराने हिंदू मंदिर ‘प्रीह विहियर (प्रीह विहार)’ को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। यह प्राचीन मंदिर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और लंबे समय से दोनों देशों के विवाद का बड़ा कारण बना हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संरक्षण से जुड़ी किसी भी सुविधा को नुकसान पहुंचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर पूरी मानवता की साझा सांस्कृतिक धरोहर है और इसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
भारत ने की शांति और संयम की अपील
भारत ने बताया कि वह इस मंदिर के संरक्षण कार्यों से लंबे समय से जुड़ा रहा है और उम्मीद करता है कि इसकी पूरी सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों से संयम बरतने, लड़ाई रोकने और बातचीत के रास्ते पर वापस आने की अपील की है।
सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, कई लोगों की मौत
इस बीच, सीमा पर तनाव फिर बढ़ गया है। पिछले हफ्ते दो थाई सैनिकों के घायल होने के बाद शुरू हुई फायरिंग में गुरुवार को तीन थाई नागरिकों की मौत हो गई। अब तक दोनों तरफ करीब 24 लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
यूनेस्को भी चिंतित, विवाद सौ साल से ज्यादा पुराना
यूनेस्को ने भी मंदिर के आसपास बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है और ज़रूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता देने की बात कही है। मंदिर को लेकर विवाद सौ साल से ज्यादा पुराना है। 1907 में फ्रेंच कॉलोनियल शासन में बने नक्शे को थाईलैंड गलत मानता है। वहीं 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया था, जिसे आज भी थाईलैंड में कई लोग स्वीकार नहीं करते।
भारत ने जताई उम्मीद, धरोहर फिर सुरक्षित होगी
भारत ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश जल्द ही शांति का रास्ता अपनाएंगे और यह प्राचीन धरोहर एक बार फिर सुरक्षित स्थिति में लौट आएगी।



