पाकिस्तान में अल जजीरा पर रोक

पीओके कवरेज को लेकर सरकार ने उठाए सवाल

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल अल जजीरा की वेबसाइट और उससे जुड़ी सेवाओं तक पहुंच को लेकर रोक लगाए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसके पीछे ‘चयनात्मक रिपोर्टिंग’ को एक कारण बताया है। खासतौर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से जुड़ी खबरों के कवरेज को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में अल जजीरा समेत कई स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइटों तक पहुंच प्रभावित हुई है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में वेबसाइटों की उपलब्धता अलग-अलग होने की भी जानकारी सामने आई है।

पीओके की रिपोर्टिंग पर आपत्ति

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अल जजीरा की कुछ रिपोर्टों से नाराज है। मंत्रालय की ओर से पीओके से संबंधित घटनाक्रम की कथित तौर पर एकतरफा या चयनात्मक रिपोर्टिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसी आधार पर चैनल की डिजिटल सेवाओं को प्रतिबंधित किए जाने की बात कही जा रही है।

कई न्यूज वेबसाइट भी प्रभावित

रिपोर्टों के मुताबिक, मामला केवल अल जजीरा तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में स्थानीय और क्षेत्रीय समाचार पोर्टलों के साथ कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों की वेबसाइटों के भी उपलब्ध नहीं होने की खबरें हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इंटरनेट पर समाचार स्रोतों की पहुंच को व्यापक स्तर पर नियंत्रित किया जा रहा है।

सेंसरशिप को लेकर बहस

अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थानों पर इस तरह की पाबंदियां लगाए जाने से पाकिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता और इंटरनेट सेंसरशिप को लेकर बहस तेज हो सकती है। आलोचकों का तर्क है कि समाचार वेबसाइटों को प्रतिबंधित करने के बजाय किसी रिपोर्ट पर आपत्ति होने की स्थिति में संबंधित मीडिया संस्थान के सामने तथ्य और स्पष्टीकरण रखा जाना चाहिए।

सरकार की दलील बनाम मीडिया की स्वतंत्रता

सरकारें अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा, गलत सूचना या पक्षपातपूर्ण कवरेज को इंटरनेट प्रतिबंधों का आधार बताती हैं। वहीं, मीडिया संगठनों का कहना है कि ऐसे कदमों से लोगों की स्वतंत्र और विविध समाचार स्रोतों तक पहुंच सीमित होती है। फिलहाल, अल जजीरा पर रोक की देशव्यापी प्रकृति, अवधि और आधिकारिक आदेश के विस्तृत प्रावधानों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

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