नेशनल गार्ड की तैनाती पर ट्रंप का यू-टर्न, कानूनी अड़चनों के बाद कदम पीछे
कानूनी अड़चनों के बाद ट्रंप ने नेशनल गार्ड की तैनाती पर लगाई रोक स्थानीय नेताओं ने फैसले को बताया राज्यों के अधिकारों में दखल अपराध पर सख्ती को मिडटर्म चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं ट्रंप

Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए फिलहाल शिकागो, लॉस एंजिल्स और पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती रोकने का ऐलान किया है। यह फैसला कानूनी चुनौतियों के सामने आने के बाद लिया गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि अभी के लिए सैनिकों को हटाया जा रहा है, लेकिन भविष्य में हालात बिगड़ने पर वे “और मजबूत तरीके” से वापसी करेंगे। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, “हम वापस आएंगे, शायद बहुत अलग और ज्यादा मजबूत रूप में, जब अपराध फिर से बढ़ने लगेगा। यह सिर्फ समय की बात है।”
स्थानीय नेताओं ने किया विरोध
ट्रंप के इस फैसले का स्थानीय और राज्य स्तर के नेताओं ने कड़ा विरोध किया था। अमेरिका में आमतौर पर नेशनल गार्ड पर राज्यों के गवर्नरों का नियंत्रण होता है, लेकिन ट्रंप ने डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों और शहरों की सहमति के बिना ही तैनाती का फैसला लिया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम अवैध इमिग्रेशन, अपराध और विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के लिए जरूरी है। अपराध के खिलाफ सख्ती को ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल का अहम एजेंडा भी बताया है।
मिडटर्म चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है फैसला
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अपराध के खिलाफ उनका सख्त रुख अगले साल होने वाले मिडटर्म चुनावों में उनके लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों शहरों में अपराध में आई कमी नेशनल गार्ड की मौजूदगी का नतीजा है। हालांकि, कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दावों की हकीकत आई सामने
ट्रंप के दावों के उलट, सच्चाई यह है कि कानूनी अड़चनों के कारण नेशनल गार्ड के सैनिक शिकागो और पोर्टलैंड की सड़कों पर कभी उतरे ही नहीं। जब शिकागो में सैनिकों की तैनाती को कोर्ट में चुनौती दी गई, तो न्याय विभाग के एक वकील ने साफ कहा कि गार्ड का काम शहर में अपराध रोकना नहीं है। वहीं पोर्टलैंड के मेयर कीथ विल्सन के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि अपराध में आई कमी स्थानीय पुलिस और सार्वजनिक सुरक्षा कार्यक्रमों की वजह से है, न कि नेशनल गार्ड की तैनाती से। शिकागो के अधिकारियों ने भी यही बात दोहराई।
ओरेगन की गवर्नर का बयान
ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने भी ट्रंप के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय को अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है कि नेशनल गार्ड को वापस बुलाया जा रहा है। टीना कोटेक ने साफ किया कि नेशनल गार्ड को कभी भी कानूनी तौर पर पोर्टलैंड में तैनात नहीं किया गया था और उनकी वहां कोई जरूरत भी नहीं थी। उन्होंने कहा, “अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है, तो यह ओरेगन के लोगों और कानून के शासन की जीत है।”



