राजस्थान में “डिस्टर्ब्ड एरिया बिल” क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

राजस्थान सरकार का नया “डिस्टर्ब्ड एरिया बिल” जनसंख्या असंतुलन रोकने के लिए लाया गया है। अशांत क्षेत्र घोषित इलाकों में संपत्ति बेचने से पहले प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी। कांग्रेस ने बिल को असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।

Rajashthan news: राजस्थान सरकार ने एक अहम विधेयक पास किया है, जिसके तहत राज्य के उन इलाकों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर नियंत्रण लगाया जाएगा, जहां किसी एक समुदाय की आबादी असंतुलित रूप से बढ़ रही है। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना और सामाजिक शांति को सुरक्षित करना है। इस विधेयक को “राजस्थान स्थावर संपत्ति हस्तांतरण प्रतिबंध एवं अशांत क्षेत्रों में किरायेदारों की सुरक्षा विधेयक, 2026” नाम दिया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में इसे पेश करने की मंजूरी दे दी है।

सरकार क्या कहना चाहती है?

राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल के मुताबिक, यह कानून उन इलाकों में लागू किया जाएगा, जहां किसी एक समुदाय की संख्या तेजी से बढ़ रही हो, जहां जनसंख्या असंतुलन के कारण सामाजिक तनाव पैदा हो रहा हो, जहां सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका हो ऐसे इलाकों को सरकार “डिस्टर्ब्ड एरिया” (अशांत क्षेत्र) घोषित कर सकेगी।

Rajashthan news: इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी?

कानून मंत्री ने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में जनसंख्या असंतुलन के चलते लोगों को, अपने पुश्तैनी मकान बेचने पर मजबूर होना पड़ा, अपनी बस्तियाँ छोड़नी पड़ीं, किराये पर घर नहीं मिला या हालात बदलने पर मकान खाली करवाया गया। सरकार का दावा है कि इन समस्याओं को रोकने के लिए यह कानून लाया जा रहा है, ताकि किसी भी व्यक्ति को दबाव में आकर अपनी संपत्ति बेचनी न पड़े।

Rajashthan news: डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित होने पर क्या बदलेगा?

यदि किसी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है, तो वहां संपत्ति बेचने से पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) या नोडल एजेंसी की अनुमति जरूरी होगी, सरकार की अधिकृत एजेंसी यह जांच करेगी कि बिक्री दबाव में तो नहीं हो रही, जबरन संपत्ति खरीदने या बिकवाने पर 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। यह कानून तीन साल तक लागू रहेगा, बाद में इसकी समीक्षा की जाएगी। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से संपत्ति बेचना चाहता है, तो उस पर पूरी तरह रोक नहीं होगी बस अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

अशांत क्षेत्र कैसे घोषित होगा?

सरकार के अनुसार किसी इलाके में दंगा होना जरूरी नहीं अगर किसी एक समुदाय का असामान्य जमावड़ा सामाजिक संतुलन बिगाड़ रहा हो, या कानून-व्यवस्था और शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो उस इलाके को अधिकतम तीन साल के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकता है।

सुरक्षा से जुड़ा पहलू

राजस्थान की करीब 1000 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगती है, जहां जनसंख्या असंतुलन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले ही चिंता जता चुकी हैं। इसके अलावा राज्य में कई बार धार्मिक जुलूसों और आयोजनों के दौरान सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। सरकार का कहना है कि यह कानून गुजरात के समान कानून की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसके लागू होने पर राजस्थान देश का दूसरा राज्य होगा, जहां ऐसा कानून लागू होगा।

कांग्रेस का विरोध

Rajashthan news: विधेयक पेश होने से पहले ही कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे असंवैधानिक बताया और आरोप लगाया कि, सरकार गुजरात मॉडल को राजस्थान में थोपना चाहती है। इससे राज्य में डर का माहौल बनेगा, निवेश और सामाजिक सौहार्द पर नकारात्मक असर पड़ेगा, कांग्रेस का कहना है कि राजस्थान एक शांतिपूर्ण राज्य है और ऐसे कानून की जरूरत नहीं है।

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