पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सख्ती चरम पर: 4 दिन पहले ‘ड्राई डे’, बाइक पर भी लगी पाबंदी

23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान, 20 से 23 तक शराब बिक्री बंद दूसरे चरण और मतगणना के दिन भी रहेगा ड्राई डे चुनाव आयोग ने सुरक्षा और निगरानी के लिए किए कड़े इंतजाम

West Bengal: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। 23 अप्रैल को राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जिसके लिए 21 अप्रैल से प्रचार थम चुका है। प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी और जनता से बड़े-बड़े वादे किए। इस बीच, चुनाव आयोग ने इस बार सख्ती बढ़ाते हुए सामान्य नियमों से अलग कदम उठाए हैं। आमतौर पर मतदान से 48 घंटे पहले शराब की बिक्री पर रोक लगती है, लेकिन इस बार 20 अप्रैल से ही पूरे राज्य में ‘ड्राई डे’ लागू कर दिया गया है, जो 23 अप्रैल तक जारी रहेगा।

दूसरे चरण और मतगणना पर भी असर

दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से पहले भी 25 अप्रैल की शाम से 29 अप्रैल तक शराब की दुकानें बंद रहेंगी। वहीं, 4 मई को मतगणना के दिन भी पूरे राज्य में शराब बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यानी अप्रैल में कुल 9 दिन और मई में 1 दिन ड्राई डे रहेगा। कोलकाता में तो और भी सख्ती देखने को मिल रही है, जहां मतदान से करीब 10 दिन पहले ही शराब की बिक्री बंद कर दी गई है।

West Bengal: बाइक पर भी लगी पाबंदी

चुनाव आयोग ने सिर्फ शराब पर ही नहीं, बल्कि आवाजाही पर भी नियंत्रण लगाया है। मतदान से दो दिन पहले संबंधित क्षेत्रों में रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बाइक चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि मेडिकल इमरजेंसी और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए छूट दी गई है।

West Bengal: सुरक्षा के लिए हाईटेक निगरानी

चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए इस बार निगरानी भी हाईटेक तरीके से की जा रही है। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने एयरफोर्स हेलीकॉप्टर से मालदा, उत्तर दिनाजपुर, कूच बिहार और मेदिनीपुर का हवाई सर्वे किया, जो पिछले 20 साल में पहली बार हुआ है। फ्लाइंग स्क्वॉड की गाड़ियों में कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव फीड कंट्रोल रूम तक पहुंच रही है। वहीं, अर्धसैनिक बलों द्वारा पूरे राज्य में बख्तरबंद गाड़ियों के साथ फ्लैग मार्च किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।

निष्कर्ष:

West Bengal: पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और सख्ती के लिहाज से भी खास नजर आ रहा है। चुनाव आयोग के कड़े कदम साफ संकेत दे रहे हैं कि इस बार किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

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