बंगाल में ‘सिंघम’ की एंट्री! क्या दीदी के गढ़ में ‘खेला’ होने वाला है?
UP के ‘सिंघम’ की एंट्री से बंगाल की सियासत गरम TMC ने लगाया चुनाव प्रभावित करने का आरोप सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 29 अप्रैल को वोटिंग

West bengal elections: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग से पहले माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। पारा सिर्फ गर्मी से नहीं, बल्कि एक ‘नाम’ से चढ़ा है, IPS अजय पाल शर्मा। चुनाव आयोग ने यूपी के इस ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ को दक्षिण 24 परगना का पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा है। बस, इसी एक फैसले ने TMC और BJP के बीच तलवारें खींच दी हैं।
क्यों उड़े हैं सियासी गलियारों के होश?
ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के इस मजबूत किले (दक्षिण 24 परगना) में अजय पाल शर्मा की तैनाती को TMC पचा नहीं पा रही है। TMC का वार: पार्टी का सीधा आरोप है कि BJP को जब केंद्रीय बलों पर भरोसा नहीं रहा, तो अब बाहर से ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अधिकारियों को बुलाकर डराने की कोशिश की जा रही है। TMC इसे चुनाव प्रभावित करने वाला कदम बता रही है।
BJP का पलटवार: बीजेपी का कहना है कि अगर चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराना है, तो ऐसे सख्त अधिकारियों की ज़रूरत है। इसमें डरने वाली क्या बात है?
West bengal elections: कौन हैं अजय पाल शर्मा, जिनसे खौफ खा रहे हैं अपराधी?
2011 बैच के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को उत्तर प्रदेश में ‘सिंघम’ कहा जाता है। लुधियाना के रहने वाले शर्मा अपनी स्टाइल और ताबड़तोड़ एनकाउंटर्स के लिए जाने जाते हैं। यूपी कैडर के इस अफसर की पहचान ही ‘क्राइम का काल’ वाली है। अब जब वो बंगाल की गलियों में नज़र आएंगे, तो ज़ाहिर है कि हड़कंप मचना तय था।
West bengal elections: आयोग का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या कुछ और?
पहले चरण की शांति के बाद चुनाव आयोग दूसरे चरण में कोई ढील नहीं देना चाहता। सिर्फ फोर्स के भरोसे बैठने के बजाय, आयोग ने इस बार ‘दिमाग और डंडा’ दोनों का इस्तेमाल किया है। सुरक्षा का अभेद्य किला: 7 जिले, 2,321 कंपनियां: केंद्रीय बलों की भारी तैनाती। निगरानी: 142 जनरल, 95 पुलिस और 100 एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर। कोलकाता का हाल: अकेले शहर में 273 कंपनियां तैनात हैं। ड्रोन से नज़र: चप्पे-चप्पे पर कैमरे और ड्रोन की पैनी नज़र है।
तारीखें नोट कर लीजिए!
West bengal elections: बंगाल के इस रण का दूसरा अध्याय 29 अप्रैल को लिखा जाएगा, जब जनता वोट डालेगी। और असली ‘धमाका’ यानी नतीजे 4 मई को आएंगे। अब सवाल यह है कि क्या यूपी के इस ‘सिंघम’ की मौजूदगी से बंगाल की चुनावी हिंसा पर लगाम लगेगी? या फिर ये विवाद और गहराएगा? आपकी क्या राय है? कमेंट में ज़रूर बताएं!
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