मुंबई में ‘मराठी’ वाले नियम पर सरकार के कदम पीछे! अब 6 महीने की ‘मोहलत’, डंडा नहीं… ट्रेनिंग चलेगी

विरोध के बाद सरकार ने लिया यू-टर्न, 6 महीने का मिला समय मराठी सीखना होगा, लेकिन फिलहाल नहीं होगी कार्रवाई ट्रेनिंग के जरिए ड्राइवरों को सिखाई जाएगी बोलचाल की भाषा

Maharashtra news: मुंबई की सड़कों पर ऑटो-टैक्सी दौड़ाने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। पिछले कुछ दिनों से जिस ‘मराठी अनिवार्य’ वाले नियम को लेकर बवाल मचा था, महाराष्ट्र सरकार ने फिलहाल उस पर ‘ब्रेक’ लगा दिया है। 1 मई से लागू होने वाला ये फरमान अब 6 महीने के लिए टाल दिया गया है। सीधी बात ये है कि सरकार अभी सख्ती के मूड में नहीं है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बात खत्म हो गई है। वेरिफिकेशन जारी रहेगा और ड्राइवरों को प्यार से मराठी सिखाई जाएगी।

क्यों झुकी सरकार? विरोध की आग और सियासी खिचड़ी

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा हाथ है तगड़ा विरोध । जैसे ही ये नियम आया, ‘मराठी बनाम गैर-मराठी’ की जंग छिड़ गई। सोशल मीडिया पर तो जैसे कीबोर्ड वॉरियर्स की फौज उतर आई। गैर-मराठी चालकों और कुछ सियासी दलों ने इसे ‘भेदभाव’ बताकर मोर्चा खोल दिया। सरकार को समझ आ गया कि अगर अभी जबरदस्ती की, तो मामला हाथ से निकल जाएगा।

Maharashtra news:  “परमिट रद्द होगा” इस एक बयान ने लगा दी थी आग

विवाद तब और भड़क गया जब परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कड़े तेवर दिखाते हुए कह दिया था कि, “मराठी नहीं आई, तो परमिट कैंसल!” बस, फिर क्या था? ड्राइवर यूनियनों ने इसे अपनी रोजी-रोटी पर हमला मान लिया और विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का मुद्दा मिल गया।

Maharashtra news: अमित ठाकरे बनाम इम्तियाज जलील: बयानों की ‘जुबानी जंग’

सियासत भी कम नहीं गरमाई। एक तरफ अमित ठाकरे (MNS) का कड़ा बयान आया कि अगर आंदोलन की वजह से किसी ‘मराठी मानुस’ को आंच आई, तो अंजाम बुरा होगा। वहीं दूसरी तरफ, इम्तियाज जलील (AIMIM) ने इसे ‘गुंडागर्दी’ करार देते हुए कहा कि “भाषा सिखाओ, थोपो मत।”

 अब ‘डंडा’ नहीं, ‘किताब’ थमाएगी सरकार!

सरकार ने अब बीच का रास्ता निकाला है। अब ड्राइवरों को डराया नहीं जाएगा, बल्कि ट्रेनिंग दी जाएगी। नया सिलेबस: परिवहन विभाग एक ऐसा कोर्स तैयार कर रहा है जिसमें सिर्फ वही मराठी सिखाई जाएगी जो सवारी से बात करने के लिए जरूरी है। मददगार संस्थाएं: मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसे दिग्गज अब ड्राइवरों को ‘क ख ग’ (अ आ इ) सिखाने में सरकार का हाथ बंटाएंगे।

News Nasha का टेक

Maharashtra news: भाषा किसी को जोड़ने का जरिया होनी चाहिए, दीवार नहीं। सरकार का ट्रेनिंग वाला फैसला समझदारी भरा है, क्योंकि जबरदस्ती से जुबान तो बदली जा सकती है, पर दिल नहीं जीता जा सकता। आपको क्या लगता है? क्या मुंबई में ऑटो-टैक्सी वालों के लिए मराठी जानना वाकई जरूरी है?

 

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