2022 में गोरखपुर में कमल हटाकर सपा साइकिल चलाने की तैयारी में, क्या सपा बदायूं और कन्नौज का लेगी बदला!

देश में लॉकडाउन बढ़ने से जहां लोगो की चिंता बढ़ गई है। वही यूपी की सियासत में कोरोना वायरस और लॉकडाउन कुछ अलग ही समीकरण बिठा रहे हैं। जी हां कहने को तो गोरखपुर शहर सीएम योगी का गढ़ हैं। जहां से महज़ 26 साल की उम्र में योगी आदित्यनाथ 1998 में 12वी लोकसभा के सदस्य बने थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर से जीत कर पांचवी बार सांसद बने थे। लेकिन अब कोरोना काल और लॉकडाउन के चलते गोरखपुर पर चढ़े भगवा रंग को धोकर समाजवादी पार्टी  समाजवादी रंग चढ़ाने में जुटी हुई है।

चूकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जहां समाजवादी पार्टी  के बदांयू ,और कन्नौज जैसे किले ढा दिए तो वो जख्म सपा के लिए भी किसी नासूर से कम नही हैं। ऐसे में उसी हार का बदला 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा गोरखपुर जीत कर बीजेपी से लेने का मंसूबा बना चुकी हैं। वैसे तो गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ का राज चलता हैं लेकिन अब उसी गोरखपुर में सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव साइकिल चलाने का पूरा मूड बना चुके हैं। और शायद यही कारण है कि इस कोरोनाकाल में लगे लॉकडाउन में जहां न पहुचे योगी वहां पहुंचे अखिलेश।

यानी कि गोरखपुर में बसों में सफर कर रहे चाहे प्रवासी मजदूरों की मदद करना हो। लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों तक राशन पहुंचाना हो या गोरखपुर में बेराज़गार हो चुके दिहाड़ी मजदूरों तक दाना पानी पहुंचाना हो। ये सारे काम सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समाजवादी सैनानी पूरी शिद्दत से कर रहे हैं। ताकि 2022 में गोरखपुर में कमल के फूल को जड़ से उखाड़ कर गोरखपुर की सड़कों पर साइकिल को दौड़ाया जा सके। हालंकि 2018 के उपचुनाव में एक बार सपा गोरखपुर में अपनी साइकिल चला चुकी है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा की साइकिल की हवा निकला दी थी।

ऐसे में 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में योगी को सीधी टक्कर देने के लिए सपा ने ठान ली हैं और गोरखपुर में साइकिल को रफ्तार देने के लिए सपा सुप्रीमों के सिपाही यानी सपाई गोरखपुर वासियों का दिल जीतने में लगे हैं और यही कारण है कि लॉकडाउन के चलते गोरखपुर में जिन लोगो के पास खाना पानी नही हैं वहां के लोगो के बीच ना सिर्फ सपाई पहुंच बना रहे है। बल्कि जरुरतमंदो को जरुरी सामान भी दे रहे हैं। गोरखपुर के जिन घरों में लॉकडाउन के चलते राशन नही है। सपा कार्यकर्ता उन घरों में राशन पहुंचाने का काम कर रहे हैं। अब देखना ये है कि सियासत की बिसात पर कोरोना नाम के मोहरे से योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव कौन सा दांव चलते हैं और सियासी शंतरज में किसे शय और मात होती हैं।

 

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