100 साल बाद टीबी के खिलाफ नई उम्मीद, सीरम बनाएगा नई वैक्सीन
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश
नई दिल्ली, एजेंसी। तपेदिक (टीबी) के खिलाफ दुनिया को जल्द बड़ी कामयाबी मिल सकती है। देश की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने गुरुवार को गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (गेट्स एमआरआई) के साथ समझौते का ऐलान किया। इसके तहत एसआईआई प्रायोगिक टीबी वैक्सीन M72/AS01E का निर्माण करेगी। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो यह करीब 100 वर्षों में टीबी के खिलाफ पहली नई वैक्सीन होगी।
सीरम इंस्टीट्यूट ने बताया कि वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी के लिए वह 100 मिलियन डॉलर (करीब 860 करोड़ रुपये) से अधिक का निवेश करेगा। गेट्स एमआरआई कंपनी को वैक्सीन के एंटीजन निर्माण की तकनीक और उत्पादन संबंधी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद बड़े स्तर पर इसका उत्पादन शुरू किया जाएगा।
करीब दो दशक से विकसित की जा रही M72/AS01E वैक्सीन फिलहाल फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में है। इसमें इस्तेमाल होने वाला AS01E एडजुवेंट ब्रिटेन की दवा कंपनी जीएसके (GSK) उपलब्ध कराएगी। जीएसके ने ही इस वैक्सीन का शुरुआती विकास किया था, जिसे बाद में गेट्स एमआरआई को लाइसेंस दिया गया। अंतिम चरण के परीक्षणों को गेट्स फाउंडेशन और वेलकम का सहयोग प्राप्त है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, टीबी अब भी दुनिया में किसी एक संक्रामक रोगाणु से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। वर्ष 2024 में दुनिया भर में करीब 1.1 करोड़ लोग टीबी से संक्रमित हुए, जबकि 12.3 लाख लोगों की मौत हुई। भारत टीबी के सबसे अधिक बोझ वाले देशों में शामिल है।
मुख्य बातें
M72/AS01E वैक्सीन का निर्माण करेगा सीरम इंस्टीट्यूट।
मंजूरी मिलने पर 100 साल में टीबी की पहली नई वैक्सीन होगी।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 100 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश।
वैक्सीन फिलहाल फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में।
WHO के अनुमान के अनुसार वैक्सीन सफल रही तो 25 वर्षों में 7.6 करोड़ नए टीबी मामलों की रोकथाम और 85 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है।
फिलहाल बीसीजी (BCG) ही टीबी के खिलाफ व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली एकमात्र वैक्सीन है।



