अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे भारतीय मूल के एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन
रूस के सोयुज MS-29 से पहली अंतरिक्ष यात्रा, आठ महीने तक करेंगे वैज्ञानिक प्रयोग
नई दिल्ली: भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने अंतरिक्ष इतिहास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए मंगलवार को रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। कजाखस्तान के बैकनूर कॉसमोड्रोम से प्रक्षेपित इस मिशन में उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकीना भी शामिल हैं। प्रक्षेपण के लगभग तीन घंटे बाद अंतरिक्ष यान ने ISS के प्रिचाल मॉड्यूल से सफलतापूर्वक डॉकिंग कर ली। यह दल लगभग आठ महीने तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोगों में हिस्सा लेगा ।
नासा के इस मिशन का उद्देश्य ऐसे वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाना है, जो भविष्य में मानव अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ पृथ्वी पर स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार लाने में मदद कर सके।
डॉ. मेनन सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव, नई चिकित्सा तकनीकों और अंतरिक्ष में जीवन से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों पर काम करेंगे। इन अध्ययनों से भविष्य के चंद्रमा और मंगल जैसे दीर्घकालिक मानव मिशनों की तैयारी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह डॉ. अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है। पेशे से चिकित्सक, फ्लाइट सर्जन और इंजीनियर रहे मेनन नासा के उन चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं जिन्हें लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों के लिए चुना गया है। मिशन के दौरान वे मानव शरीर पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) के प्रभाव, अंतरिक्ष चिकित्सा, नई तकनीकों के परीक्षण तथा भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोगों में भाग लेंगे।
क्या है अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS)?
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी मानव-निर्मित अंतरिक्ष प्रयोगशाला है। इसका निर्माण अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा के संयुक्त सहयोग से किया गया। वर्ष 1998 में इसकी शुरुआत हुई थी और नवंबर 2000 से यहां लगातार मानव मौजूद है।
ISS से जुड़े प्रमुख तथ्य:
* पृथ्वी से इसकी औसत ऊंचाई लगभग 400 किलोमीटर है।
* यह करीब 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
* स्टेशन लगभग 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है, यानी अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन लगभग 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देखते हैं।
* इसका आकार लगभग एक फुटबॉल मैदान जितना है।
* स्टेशन में रहने, वैज्ञानिक अनुसंधान, ऊर्जा उत्पादन और जीवन-समर्थन के लिए कई मॉड्यूल लगे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है ISS?
ISS केवल एक अंतरिक्ष स्टेशन नहीं, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की प्रयोगशाला है। यहां वैज्ञानिक अनेक विषयों पर शोध करते हैं जिनमें प्रमुख हैं ;
* सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का मानव शरीर पर प्रभाव।
* कैंसर, हृदय रोग, अस्थि क्षय (Osteoporosis) और मांसपेशियों से जुड़े जैव-चिकित्सकीय अध्ययन।
* नई दवाओं और उन्नत सामग्री (Advanced Materials) का विकास।
* रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त प्रणालियों का परीक्षण।
* जल पुनर्चक्रण, खाद्य उत्पादन और जीवन-समर्थन प्रणालियों का विकास, जो भविष्य के चंद्रमा और मंगल अभियानों के लिए आवश्यक होंगे।
भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन?
हालांकि डॉ. अनिल मेनन नासा के अंतरिक्ष यात्री हैं, लेकिन उनका भारतीय मूल होने के कारण यह मिशन भारत के लिए भी विशेष महत्व रखता है। ऐसे समय में जब भारत गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारी कर रहा है, मेनन का अनुभव वैश्विक स्तर पर मानव अंतरिक्ष उड़ानों में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
अंतरिक्ष सहयोग का प्रतीक
रूस और पश्चिमी देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद ISS आज भी वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण बना हुआ है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री का रूसी सोयुज यान से उड़ान भरना और दोनों देशों का संयुक्त रूप से अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन करना इस सहयोग की निरंतरता को दर्शाता है।



