एमसीयू की छात्र राजनीति में हलचल, एबीवीपी के 20 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

MCU में ABVP इकाई के 20 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा आंतरिक गुटबाजी से नाराज छात्र नेताओं का बड़ा कदम विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान

ABVP: भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अचानक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े विश्वविद्यालय इकाई के महासचिव (मंत्री) आदित्य शर्मा, उपाध्यक्ष सोनम सिंह, दो सहमंत्रियों सहित करीब 16 कार्यकारिणी सदस्यों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

 

जानिए क्यों हुए लगातार एक साथ इतने इस्तीफे

सूत्रों के अनुसार इस्तीफों के पीछे संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति को मुख्य कारण बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि नई कार्यकारिणी के गठन और पदों के वितरण को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ था। जानकारी के मुताबिक, कार्यकारिणी में प्रथम वर्ष के छात्र को महासचिव बनाए जाने को लेकर भी संगठन के भीतर मतभेद उभर आए थे। सूत्रों का यह भी कहना है कि इकाई की पूर्व अध्यक्ष ने भी नए पदाधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

 

पूर्व मंत्री आदित्य शर्मा ने दी अपनी प्रतिक्रिया

एबीवीपी इकाई के पूर्व मंत्री आदित्य शर्मा ने बताया कि “वे विधार्थी परिषद से जुड़े हुए है उन्होंने केवल इकाई के दायित्व से इस्तीफा दिया है।” हालांकि अभी तक उन्होंने अंदरूनी कलह को खुलकर सामने नहीं रखा है। इस मामले में NSUI प्रदेश सचिव अमन पठान ने बयान देते हुए एबीवीपी पर तंज कसा l “माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में ABVP आज प्रशासन की बैसाखी पर अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। छात्रों के मुद्दों पर खड़े होने के बजाय सत्ता-संरक्षण की राजनीति ने संगठन को अंदर से खोखला कर दिया है। एबीवीपी में संघर्ष करने वालों को तरजीह नहीं मिलती, जी-हजूरी करने वालों को इनाम मिलता है। जो छात्र सवाल उठाते हैं, उन्हें किनारे किया जाता है और यही कारण है कि संगठन भीतर से टूट रहा है। उन्होंने कहा, “एबीवीपी की अंदरूनी कलह अब साफ तौर पर सामने आई है। पूर्व अध्यक्ष की तानाशाही के चलते इस सत्र में भी पदाधिकारी इस्तीफे की भेंट चढ़ गए। उन्होंने यह भी बताया की कुछ कार्यकर्ताओं को एनएसयूआई में जुड़वाने को लेकर मंथन चल रहा है।” 

 

इस्तीफे के बाद से मचा हड़कंप

करीब 30 से अधिक सदस्यों वाली कार्यकारिणी में एक साथ लगभग 20 पदाधिकारियों के इस्तीफे को छात्र राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। फिलहाल इस मामले पर संगठन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विश्वविद्यालय परिसर में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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