ईरान की तेल वाली नस अमेरिका ने दबाई, होर्मुज की घेराबंदी से हिल गया ग्लोबल मार्केट
2 महीने की जंग में बढ़ा दबाव होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा हथियार मई तक और घट सकता है तेल उत्पादन

Iran crisis: दो महीने से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो घमासान चल रहा है, उसने अब पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। शांति की सारी बातें धरी की धरी रह गई हैं और मामला सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है। इस पूरी लड़ाई में सबसे बड़ा मोहरा बना है होर्मुज स्ट्रेट, जहां अमेरिका ने ऐसी तगड़ी नाकेबंदी कर दी है कि ईरान का दम फूलने लगा है।
होर्मुज की घेराबंदी ने बिगाड़ा खेल
जब से होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी पहरा बढ़ा है, ईरान के तेल का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालत ये है कि रोजाना करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल बंदरगाहों पर ही फंसा हुआ है। अब जब इतना सारा तेल बाजार में नहीं पहुंचेगा, तो ग्लोबल सप्लाई का लड़खड़ाना तो तय है। पूरी दुनिया की नजरें अब इसी रास्ते पर टिकी हैं।
Iran crisis: स्टोरेज की जगह खत्म, अब कुओं पर ताला लगाने की नौबत
केपलर की ताजा रिपोर्ट डराने वाली है। ईरान के पास अब तेल रखने की जगह ही नहीं बची है। बस 12 से 22 दिनों का स्टोरेज बाकी है। अगर ये नाकेबंदी नहीं खुली, तो ईरान को मजबूरी में अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ेगा। माना जा रहा है कि मई के बीच तक ईरान को रोजाना 15 लाख बैरल की और कटौती करनी पड़ सकती है।
Iran crisis: तेल के बाजार में मची है खलबली
गोल्डमैन सैक्स के आंकड़े बता रहे हैं कि ईरान पहले ही 25 लाख बैरल रोजाना का प्रोडक्शन कम कर चुका है। असर सिर्फ ईरान तक नहीं है, सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों ने भी हाथ खींच लिए हैं। सप्लाई कम होने से आने वाले दिनों में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
ट्रम्प की जिद और कूटनीति का पेच
डोनाल्ड ट्रम्प इस बार किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने संकेत दे दिए हैं कि होर्मुज में ये नाकेबंदी लंबी चल सकती है। वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के साथ डील करना लोहे के चने चबाने जैसा है। इसके लिए बहुत ज्यादा सब्र और सम्मान वाली बातचीत चाहिए, जो फिलहाल कहीं दिख नहीं रही है।
ईरान का अगला कदम: इंतजार करो और देखो
Iran crisis: इतने भारी आर्थिक नुकसान के बावजूद ईरान घुटने टेकने को तैयार नहीं है। वो अपनी पुरानी चाल चल रहा है, शांति से बैठो और सही वक्त का इंतजार करो। ईरान फिलहाल देख रहा है कि अमेरिका की इस घेराबंदी का असर दुनिया पर क्या पड़ता है और उसे पलटवार का मौका कब मिलता है।
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