ट्रंप का U-टर्न और ईरान की अकड़, पाकिस्तान में होने वाली महा-मुलाकात फ्लॉप! क्या अब बढ़ेगा जंग का खतरा?
इस्लामाबाद में पीस टॉक का सस्पेंस: ट्रंप ने बीच रास्ते से दूत बुलाए वापस, ईरान ने भी दिखाए कड़े तेवर! आमने-सामने बैठने को तैयार नहीं ईरान, विदेश मंत्री अराघची मॉस्को रवाना; क्या फेल हो गई पाकिस्तान की मध्यस्थता? जंग या शांति? सोमवार को होगा अमेरिका-ईरान विवाद का बड़ा फैसला, ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से बिगड़ा खेल।

Iran crisis: दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी थीं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति की खिचड़ी पकने वाली थी। लेकिन ऐन मौके पर बाजी पलट गई। कूटनीति के इस खेल में शनिवार को ऐसा ड्रामा हुआ कि ट्रंप ने अपने दूतों को रास्ते से ही वापस बुला लिया।
बीच रास्ते से लौटे अमेरिकी दूत: ट्रंप बोले- ‘हमें कोई जल्दी नहीं’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से सबको चौंका दिया। जैसे ही उन्हें भनक लगी कि बात नहीं बन रही, उन्होंने अपने दूतों के ब्रेक लगा दिए। ट्रंप का दोटूक बयान है कि बिना किसी ठोस एजेंडे के इतनी लंबी यात्रा का कोई मतलब नहीं है। ईरान को जब बात करनी हो, हमसे संपर्क करे, हमारे पास सारे विकल्प खुले हैं। रणनीति साफ़ है कि ट्रंप अब प्रेशर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं और ईरान को झुकने पर मजबूर करना चाहते हैं।
Iran crisis: ईरान का इनकार और इस्लामाबाद से विदाई
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचे, पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर से मिले, अपनी शर्तें रखीं और शनिवार रात ही बोरिया-बिस्तर समेट कर निकल गए। ईरान ने साफ कह दिया है कि वह अमेरिका के साथ आमने-सामने बैठकर टेबल टॉक नहीं करेगा। अराघची अब मॉस्को चले गए हैं। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान कोई नया प्रपोजल लाता है, तभी वह वापस लौटेंगे।
Iran crisis: क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता हो गई फेल?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दावा किया था कि बातचीत की पहल ईरान की तरफ से हुई थी और पाकिस्तान इसमें बड़ा रोल निभाएगा। लेकिन फिलहाल पाकिस्तान खाली हाथ नजर आ रहा है। कूटनीति में दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते। अब सबकी नजरें सोमवार पर टिकी हैं। क्या पाकिस्तान ईरान को दोबारा मना पाएगा?
न्यूज़ नशा का सवाल:
Iran crisis: क्या यह शांति वार्ता सिर्फ एक दिखावा थी या ट्रंप वाकई ईरान को ठोककर सीधा करना चाहते हैं? अगर सोमवार को बात नहीं बनी, तो खाड़ी देशों में बारूद की गंध और तेज हो सकती है।
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