गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: मजिस्ट्रेटी जांच में बड़ा खुलासा

मजिस्ट्रेटी जांच में खुलासा: अवैध जमीन पर बना था नाइटक्लब बिना वैध लाइसेंस और फायर सेफ्टी के चलता रहा क्लब 25 मौतों के बाद 8 गिरफ्तार, 5 सरकारी अधिकारी निलंबित

Goa: गोवा के अरपोरा गांव में 6 दिसंबर को हुए भीषण नाइटक्लब अग्निकांड को लेकर मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। इस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की जान चली गई थी। जांच में खुलासा हुआ है कि ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाम का नाइटक्लब पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नाइटक्लब सॉल्ट पैन और जल क्षेत्र के बीच स्थित जमीन पर बनाया गया था, जो गोवा भूमि राजस्व संहिता और तटीय क्षेत्र (CRZ) नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसके अलावा क्लब बिना वैध ट्रेड लाइसेंस के लंबे समय तक चलता रहा। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पेश की गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसे सार्वजनिक कर दिया।

 

लाइसेंस खत्म होने के बाद भी चलता रहा नाइटक्लब

अरपोरा-नागोआ ग्राम पंचायत ने 16 दिसंबर 2023 को क्लब को बार, रेस्टोरेंट और नाइटक्लब के रूप में संचालन की अनुमति दी थी। यह लाइसेंस 31 मार्च 2024 तक वैध था, लेकिन इसके बाद न तो इसका नवीनीकरण किया गया और न ही क्लब का संचालन रोका गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पंचायत के पास परिसर को सील करने का अधिकार होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। पंचायत सचिव और सरपंच के बयानों से यह भी सामने आया है कि क्लब मालिकों के साथ मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

 

लाइसेंस प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा और गंभीर खामियां

रिपोर्ट में लाइसेंस आवेदन से जुड़ी कई अनियमितताएं उजागर हुई हैं। आवेदन में फर्जी एंट्री, अलग-अलग स्याही से जोड़ी गई जानकारियां और जरूरी दस्तावेजों की कमी पाई गई। स्वीकृत नक्शा, भूमि रिकॉर्ड और स्थल की तस्वीरें तक आवेदन में शामिल नहीं थीं। इसके बावजूद, 11 दिसंबर 2023 को मिले आवेदन को महज 5 दिनों में मंजूरी दे दी गई और 16 दिसंबर को लाइसेंस जारी कर दिया गया, जो पूरी प्रक्रिया की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

 

बिना सुरक्षा इंतजामों के हुई आतिशबाजी, बनी आग की वजह

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, क्लब में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के आतिशबाजी कराई जा रही थी, जिससे आग भड़क उठी। क्लब में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं थे। ग्राउंड फ्लोर और डेक फ्लोर दोनों जगह इमरजेंसी एग्जिट की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे लोग बाहर नहीं निकल सके।

 

हाईकोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी

जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच क्लब को लेकर कई शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें शोर और पार्किंग की समस्याएं शामिल थीं। हालांकि, इन सभी शिकायतों को ‘कुछ नहीं मिला’ कहकर बंद कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बॉम्बे हाईकोर्ट (गोवा बेंच) द्वारा क्लबों के नियमित निरीक्षण और रात में गश्त के दिए गए आदेशों का पालन नहीं किया गया।

 

अब तक 8 गिरफ्तार, 5 अधिकारी निलंबित

इस मामले में पुलिस अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें क्लब के 3 मालिक शामिल हैं। दिल्ली के कारोबारी और सह-मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा घटना के बाद विदेश फरार हो गए थे, लेकिन उन्हें 17 दिसंबर को भारत वापस लाया गया। इसके अलावा, 5 सरकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से जान को खतरे में डालना, आग से जुड़ी लापरवाही, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं।

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