न्यूयॉर्क से आई दुखद खबर, पिता अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पोस्ट में साझा किया दर्द

न्यूयॉर्क में हुए दर्दनाक हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया पिता अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पोस्ट के ज़रिये बयां किया अपना असहनीय दर्द सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट देख लोगों ने जताई संवेदना और दुख

Buisness news: प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल अग्रवाल के बेटे अनिवेश अग्रवाल का 49 वर्ष की उम्र में अमेरिका में निधन हो गया। अनिवेश अपने दोस्तों के साथ अमेरिका में स्कीइंग के लिए गए थे, जहां एक हादसे के बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण अनिवेश का निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है। उन्होंने कहा कि बेटे की असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। अनिवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे चंचल, मिलनसार और परिवार से बेहद जुड़े हुए थे।

 

मजबूत व्यक्तित्व, सादगी से भरा जीवन

अनिवेश अग्रवाल ने अपनी पढ़ाई मेयो कॉलेज, अजमेर से की थी। वे बॉक्सिंग चैंपियन रहे, घुड़सवारी के शौकीन थे और एक बेहतरीन संगीतकार भी थे। उन्होंने फुजैराह गोल्ड जैसी कंपनी की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी भी संभाली। इतनी उपलब्धियों के बावजूद अनिवेश बेहद सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति थे। वे अपने दोस्तों, सहयोगियों और कर्मचारियों के बीच घुल-मिलकर रहते थे। जो भी उनसे मिलता, उसे अपनापन महसूस होता था।

 

देश और समाज के लिए बड़े सपने

पिता अनिल अग्रवाल ने बताया कि अनिवेश का सपना भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। वे अक्सर कहते थे, “पापा, हमारे देश में क्या नहीं है, फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?” उनका सपना था कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, हर महिला आत्मनिर्भर बने और युवाओं को रोजगार मिले। अनिल अग्रवाल ने यह भी दोहराया कि उन्होंने अनिवेश से वादा किया था कि अर्जित संपत्ति का 75 प्रतिशत से अधिक समाज सेवा में लगाया जाएगा, और वे इस वादे को आगे भी निभाते रहेंगे।

 

पिता का भावुक संदेश

अपने बेटे को याद करते हुए अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अनिवेश सिर्फ उनका बेटा नहीं, बल्कि उनका दोस्त, उनकी शान और उनकी पूरी दुनिया था। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी ज़िंदगी अब अधूरी हो गई हो, लेकिन वे अनिवेश के सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे।

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