88 साल की उम्र में पीरजादा-रईस-मियाँ-चिश्ती का निधन , 81 साल तक फतेहपुर सीकरी दरगाह के रहे गद्दीनशीन
सूफी समुदाय, दरगाह से जुड़े अनुयायियों तथा देशभर के जायरीन में शोक की लहर

विश्व प्रसिद्ध हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती (Pirzada Rais Miyan) का बुधवार देर रात लखनऊ में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन से सूफी समुदाय, दरगाह से जुड़े अनुयायियों तथा देशभर के जायरीन में शोक की लहर फैल गई है।

परिजनों के अनुसार, पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने बुधवार रात लगभग 11:30 बजे लखनऊ स्थित एरा मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और उपचाराधीन थे।
फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा
सुपुत्र अरशद फरीदी ने बताया कि पीरजादा रईस मियां चिश्ती का जनाजा गुरुवार को असर की नमाज के बाद शाम लगभग 5:15 बजे फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम दर्शन एवं जनाजे में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से जायरीन, उलेमा, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
पीरजादा रईस मियां चिश्ती सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की 16वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज थे। उन्होंने मात्र सात वर्ष की आयु में सज्जादानशीन का दायित्व संभाला और लगभग 81 वर्षों तक इस परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान उन्होंने सूफी परंपरा के प्रेम, शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। वह हिंदू-मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, गंगा-जमुनी तहजीब तथा अंतरधार्मिक संवाद के प्रबल समर्थक माने जाते थे।
अपने लंबे कार्यकाल में उनके नेतृत्व में दरगाह पर भारत और विदेशों से अनेक राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों, राजपरिवारों के सदस्यों, राजनयिकों तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने जियारत की।



