जब बोस्टन की सड़कों पर बहने लगा गुड़: इतिहास का सबसे अजीब हादसा
बोस्टन में 1919 का वो दिन, जब सड़कों पर पानी नहीं बल्कि गुड़ बह रहा था एक लापरवाही ने कैसे छीनी 21 लोगों की जान और तबाह कर दिया पूरा इलाका ग्रेट मोलासेस फ्लड से बदले अमेरिका के इंजीनियरिंग सुरक्षा कानून

15 जनवरी 1919 की दोपहर अमेरिका के बोस्टन शहर में कुछ ऐसा हुआ, जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। दोपहर करीब 12:30 बजे बोस्टन के नॉर्थ एंड इलाके में एक भयानक हादसा हुआ, जिसे इतिहास में ‘ग्रेट मोलासेस फ्लड’ या ‘बोस्टन मोलासेस डिजास्टर’ के नाम से जाना जाता है। इस हादसे में गुड़ (शीरा) से भरा एक विशाल टैंक अचानक फट गया और बोस्टन की सड़कों पर गुड़ की बाढ़ आ गई। इस अजीब लेकिन जानलेवा हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
कैसे रखी गई थी इस तबाही की नींव?
जिस टैंक के फटने से यह तबाही मची, उसे साल 1915 में बनाया गया था। यह टैंक प्योरिटी डिस्टिलिंग कंपनी का था, जो बाद में यूनाइटेड स्टेट्स इंडस्ट्रियल अल्कोहल (USIA) का हिस्सा बनी। टैंक को बोस्टन बंदरगाह के पास एक व्यस्त इलाके कमर्शियल स्ट्रीट पर खड़ा किया गया था। करीब 50 फीट ऊंचे और 90 फीट चौड़े इस टैंक में लगभग 23 लाख गैलन गुड़ भरा जा सकता था। इस गुड़ का इस्तेमाल शराब और औद्योगिक अल्कोहल बनाने में होता था, जो पहले विश्व युद्ध के दौरान हथियार निर्माण के लिए जरूरी था। युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका में शराबबंदी लागू होने वाली थी, इसलिए कंपनी जल्दबाज़ी में ज्यादा से ज्यादा गुड़ जमा कर रही थी।
लेकिन यह टैंक शुरू से ही खतरनाक था।
स्टील की चादरें जरूरत से पतली थीं, धातु में मजबूती देने वाला मैंगनीज नहीं था, किसी प्रोफेशनल इंजीनियर की निगरानी में निर्माण नहीं हुआ, लीकेज टेस्ट तक नहीं किया गया। टैंक से अक्सर गुड़ रिसता रहता था। हालात ऐसे थे कि आसपास के लोग बहते गुड़ को बाल्टियों में भरकर घर ले जाते थे। कंपनी ने समस्या ठीक करने के बजाय टैंक को भूरे रंग से पेंट कर दिया, ताकि रिसाव नजर न आए।
उस दिन ऐसा क्या हुआ कि टैंक फट गया?
जनवरी 1919 की शुरुआत में बोस्टन में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, लेकिन 15 जनवरी को अचानक तापमान बढ़ गया। कुछ इलाकों में तापमान 2 डिग्री फारेनहाइट से बढ़कर 41 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया। इससे ठीक दो दिन पहले एक जहाज से गर्म गुड़ टैंक में डाला गया था, जबकि टैंक में मौजूद पुराना गुड़ बेहद ठंडा था। गर्म और ठंडे गुड़ के मिलने से अंदर दबाव बढ़ गया। ऊपर से गुड़ में हो रहे फर्मेंटेशन के कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनने लगी, जिसने हालात और बिगाड़ दिए। आखिरकार दोपहर के वक्त दबाव इतना बढ़ा कि टैंक का मैनहोल कवर जोरदार धमाके के साथ फट गया।
जब गुड़ बन गया जानलेवा सैलाब
टैंक फटते ही करीब 25 फीट ऊंची गुड़ की लहर निकली, जो लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सड़कों पर फैल गई। गुड़ की इस बाढ़ ने कई ब्लॉक्स तबाह कर दिए। इमारतें ढह गईं, गाड़ियां पलट गईं और कई घोड़े चिपचिपे गुड़ में फंसकर तड़पने लगे। इतना ही नहीं, गुड़ के जबरदस्त दबाव से बोस्टन एलिवेटेड रेलवे की पटरी टूट गई और एक ट्रेन पटरी से उतर गई। पूरा बंदरगाह भूरा दिखाई देने लगा। ठंड के कारण गुड़ तेजी से गाढ़ा होता गया, जिससे उसमें फंसे लोगों के लिए निकलना लगभग नामुमकिन हो गया।
कैसे गई 21 लोगों की जान?
इस हादसे में मरने वालों में मजदूर, ड्राइवर, महिलाएं, बच्चे और यहां तक कि फायरफाइटर भी शामिल थे। कुछ लोग भगदड़ में कुचल गए, कई लोग गुड़ की बाढ़ में डूब गए, कई लोगों की दम घुटने से मौत हुई, करीब 150 लोग घायल हुए। किसी को गंभीर चोटें आईं, कोई गर्म गुड़ से झुलस गया तो किसी को सांस लेने में दिक्कत हुई। कई घोड़े भी इस चिपचिपे सैलाब में फंसकर मर गए। हालात इतने भयावह थे कि कुछ शव महीनों बाद मिले।
रेस्क्यू ऑपरेशन भी बना बड़ी चुनौती
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, रेड क्रॉस, सेना और नौसेना मौके पर पहुंच गई। USS नैंटिकेट के 116 कैडेट्स घुटनों तक गुड़ में उतरकर लोगों को बाहर निकालते रहे। घटनास्थल पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया। लेकिन गाढ़े होते गुड़ ने राहत कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया। इलाके की सफाई में हफ्तों लग गए। समुद्री पानी की मदद से गुड़ को धोया गया। इसके बावजूद बोस्टन के कई हिस्सों में सालों तक गर्मियों में गुड़ की बदबू आती रही।
इस हादसे ने दुनिया को क्या सिखाया?
हादसे के बाद पीड़ितों ने USIA कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। यह मैसाचुसेट्स का पहला क्लास-एक्शन केस था।कंपनी ने दावा किया कि यह किसी साजिश या बम धमाके का नतीजा था, लेकिन अदालत ने कंपनी को ही दोषी ठहराया।करीब 3 साल चली सुनवाई, 3000 से ज्यादा गवाह, और आखिरकार कंपनी को 6 लाख 28 हजार डॉलर मुआवजा देना पड़ा। हर मौत पर करीब 7000 डॉलर दिए गए। इस हादसे के बाद अमेरिका में इंजीनियरिंग और निर्माण सुरक्षा कानूनों में बड़े बदलाव किए गए। अब किसी भी बड़े निर्माण में लाइसेंसी इंजीनियर की मौजूदगी जरूरी कर दी गई। आज जिस जगह यह हादसा हुआ था, वहां लैंगोन पार्क है। वहां एक पट्टिका लगी है, जो इस अजीब लेकिन भयावह घटना की याद दिलाती है। साल 2019 में, हादसे के 100 साल पूरे होने पर, पीड़ितों को याद करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। यह घटना आज भी चेतावनी देती है कि छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।



