ईरान से जंग में 20 दिन बाद ही अमेरिका पर आर्थिक दबाव, पेंटागन ने मांगे 200 अरब डॉलर
20 दिन की जंग में अमेरिका पर आर्थिक दबाव तेल की कीमतों में 60% उछाल से वैश्विक असर मिडिल ईस्ट में ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज

Iran crisis: ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका पर अब आर्थिक दबाव साफ नजर आने लगा है। करीब 20 दिनों के भीतर ही हालात ऐसे हो गए हैं कि अमेरिकी युद्ध मंत्रालय को अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत पड़ गई है। पेंटागन ने युद्ध जारी रखने के लिए व्हाइट हाउस से लगभग 200 अरब डॉलर की मांग की है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
जंग का असर अब सीधे वैश्विक बाजार पर दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में 60% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज
इजरायल द्वारा ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्र साउथ पार्स पर हमले के बाद तनाव और बढ़ गया। जवाब में ईरान ने सऊदी अरब की रेड सी रिफाइनरी, कतर की एलएनजी सुविधाओं और कुवैत की दो तेल रिफाइनरियों पर हमला किया। इन हमलों के चलते पूरे मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ गए हैं।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपने हमले जारी रखता है तो अमेरिका बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करेगा और उसके गैस ठिकानों को तबाह कर देगा।
पेंटागन पर बढ़ा दबाव
लगातार युद्ध और सैन्य खर्च के चलते पेंटागन की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। अब उसने साफ कर दिया है कि मौजूदा संसाधनों के साथ आगे युद्ध जारी रखना मुश्किल है, इसलिए अतिरिक्त फंडिंग जरूरी है।
नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता
इस बीच अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान के नए नेता Mojtaba Khamenei की हालत ठीक नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया हमलों में उन्हें गंभीर चोटें आई हैं, जिससे ईरान की नेतृत्व व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।



