ईरान युद्ध के बीच खतरे में वैश्विक सप्लाई चेन, दुनिया के ये 5 समुद्री रास्ते बने ‘चोक पॉइंट’
समुद्री रास्तों पर बढ़ा खतरा, वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहा संकट ईरान युद्ध के बाद अहम ‘चोक पॉइंट’ बने चिंता की वजह सप्लाई चेन में रुकावट से दुनियाभर के बाजारों पर असर

दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्री व्यापार पर टिकी हुई है। कच्चे तेल, गैस, खाद्यान्न और रोजमर्रा की चीजें सब कुछ बड़े पैमाने पर समुद्र के रास्ते ही एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। ऐसे में कुछ समुद्री रास्ते ग्लोबल सप्लाई चेन की रीढ़ बन चुके हैं। इन रास्तों पर जरा सी भी रुकावट चाहे युद्ध हो, टकराव या समुद्री डकैती पूरी दुनिया के बाजारों को हिला सकती है। ईरान से जुड़े हालिया तनाव ने भी इसी चिंता को बढ़ा दिया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिख रहा है।
होर्मुज के अलावा भी हैं बड़े ‘चोक पॉइंट’
ईरान युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन इसके अलावा भी दुनिया में कई ऐसे समुद्री गलियारे हैं जो व्यापार के लिहाज से बेहद अहम और जोखिम भरे माने जाते हैं।
स्वेज नहर
मिस्र में स्थित स्वेज नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता है, जो भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है। 1869 में शुरू हुई यह नहर करीब 193 किलोमीटर लंबी है। इसकी वजह से जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता। दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 10-12% हिस्सा यहीं से गुजरता है। हालांकि, लाल सागर क्षेत्र में तनाव, हूती हमले और समुद्री डकैती के खतरे के कारण यह मार्ग अक्सर जोखिम में रहता है।
पनामा नहर
मध्य अमेरिका में स्थित पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। इससे अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच करीब 8000 मील की दूरी कम हो जाती है। हर साल अमेरिका के करीब 40% कंटेनर ट्रैफिक इसी रास्ते से गुजरता है। लेकिन यहां पानी का स्तर घटने की समस्या बार-बार सामने आती है, जिससे जहाजों के आकार और आवाजाही पर असर पड़ता है।
मलक्का जलडमरूमध्य
इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है। यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है और एशिया के लिए बेहद अहम है। दुनिया के लगभग 24% समुद्री व्यापार और 45% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। खास तौर पर चीन के लिए यह लाइफलाइन है, क्योंकि उसके करीब 80% तेल आयात का रास्ता यही है।
बाब अल-मंडेब
यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी के जरिए अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के करीब 12% व्यापार का रास्ता यहीं से गुजरता है। अगर यहां कोई बाधा आती है तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता लेना पड़ता है, जिससे डिलीवरी में 15-20 दिन तक की देरी हो सकती है।
बोस्फोरस और डार्डानेल्स
तुर्की में स्थित ये दोनों जलडमरूमध्य यूरोप और एशिया के बीच अहम कड़ी हैं। डार्डानेल्स भूमध्य सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है, जबकि बोस्फोरस काला सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है। बोस्फोरस की लंबाई करीब 31 किमी और डार्डानेल्स की 61 किमी है। ये रास्ते खासकर तेल और अनाज के व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। कुल मिलाकर, ये सभी समुद्री रास्ते दुनिया की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन हैं। इनमें किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।



