बेंगलुरु मेट्रो के बढ़े किरायों पर फिलहाल रोक, BMRCL करेगा समीक्षा
जनविरोध के बाद BMRCL ने किराया बढ़ोतरी पर लगाई रोक 9 फरवरी से लागू होने वाला नया किराया फिलहाल टला मेट्रो बोर्ड करेगा फैसले की दोबारा समीक्षा

BMRCL: बेंगलुरु में नम्मा मेट्रो के किरायों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। भारी जनविरोध और राजनीतिक दबाव के बीच बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने अपने फैसले को टालने का ऐलान किया है। 5 फरवरी को घोषित नए किरायों को 9 फरवरी से लागू किया जाना था, लेकिन अब मेट्रो बोर्ड ने किराया ढांचे की दोबारा समीक्षा करने की बात कही है।
क्या था नया किराया प्लान?
BMRCL ने 96.10 किलोमीटर लंबे नम्मा मेट्रो नेटवर्क को 10 जोनों में बांटकर किरायों में 1 से 5 रुपये तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। 2 किलोमीटर तक का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये किया जाना था। 15 से 20 किलोमीटर की दूरी के लिए किराया 70 की जगह 74 रुपये तय किया गया, 30 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर किराया 90 से बढ़ाकर 95 रुपये करने की योजना थी। इसके अलावा, टूरिस्ट पास और ग्रुप टिकटों की कीमतों में भी करीब 5 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, स्मार्ट कार्ड यूजर्स को मिलने वाली छूट पहले की तरह ही जारी रखने की बात कही गई थी—पीक ऑवर्स में 5% और नॉन-पीक ऑवर्स में 10%।
राजनीति भी गरमाई
किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर कर्नाटक की राजनीति भी गर्म हो गई। बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। राज्य मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मेट्रो विस्तार का श्रेय लेते हैं, लेकिन किराया बढ़ने पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाता है। खड़गे ने साफ किया कि किराया निर्धारण समिति (FFFC) केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त की जाती है और उसके फैसले बाध्यकारी होते हैं। वहीं, बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने किराया बढ़ोतरी पर रोक को जनता की जीत बताया। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सब्सिडी देना बंद कर दिया है, इसी वजह से बेंगलुरु मेट्रो देश की सबसे महंगी मेट्रो बनती जा रही है। उन्होंने वैज्ञानिक आधार पर नया किराया तय करने के लिए नई समिति गठित करने की मांग की।
आखिर क्यों बढ़ाना पड़ा किराया?
BMRCL का कहना है कि परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से किराया बढ़ाना जरूरी हो गया था, ताकि यात्रियों पर एक साथ ज्यादा बोझ न पड़े। हालांकि, जानकारों की मानें तो राज्य सरकार की कमजोर वित्तीय स्थिति और सब्सिडी में कटौती भी मेट्रो प्रशासन के इस फैसले की बड़ी वजह रही है।



