पाकिस्तान में सत्ता समीकरण बदलने वाले कदम, असीम मुनीर बने देश के पहले CDF
पाकिस्तान में पहली बार CDF पद का गठन, असीम मुनीर बने तीनों सेनाओं के सर्वोच्च प्रमुख। इस कदम से सेना को मिली अभूतपूर्व ताकत, सुप्रीम कोर्ट और पीएम से भी ऊपर पहुंची पकड़। इमरान खान पर कसता शिकंजा, राजनीतिक संकट और गहराने की आशंका।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने हाल ही में फील्ड मार्शल बनाए गए असीम मुनीर को औपचारिक रूप से देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस (CDF) नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही मुनीर अब पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के सर्वोच्च प्रमुख बन गए हैं, और उनका कार्यकाल पाँच साल का तय हुआ है। यह पद पाकिस्तान में संविधान संशोधन के बाद सृजित किया गया है और अब इसे देश की सबसे शक्तिशाली सैन्य कुर्सी माना जा रहा है। असीम मुनीर, जनरल अयूब खान के बाद पाकिस्तान के दूसरे अधिकारी हैं जिन्हें फील्ड मार्शल का दर्जा मिला है।
CDF बनने के बाद असीम मुनीर कितने ताकतवर हो गए?
CDF बनने के साथ ही मुनीर की ताकत पाकिस्तान में नए स्तर पर पहुंच गई है, सेना, वायु सेना और नौसेना—तीनों पर अब प्रत्यक्ष नियंत्रण। परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम का कंट्रोल भी अब उन्हीं के पास। प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ऊपर जैसी स्थिति, क्योंकि फील्ड मार्शल की विशेष कानूनी सुरक्षा उन्हें आजीवन किसी भी जांच या अभियोग से बचाती है।संविधान के 27वें संशोधन के बाद सेना की ताकत को स्थायी रूप से शीर्ष पर स्थापित कर दिया गया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इस बदलाव को देश के लिए सबसे विवादास्पद और खतरनाक संशोधनों में से एक कहा है।
इमरान खान पर बढ़ा दबाव — क्या होगा अब?
असीम मुनीर की नियुक्ति पर मुहर लगने से ठीक पहले पाकिस्तान में चुपचाप तख्तापलट की तैयारी की खबरें सामने आई थीं। इमरान खान की जेल में हालत खराब होने की अफवाह ने बड़ा बवाल किया और PTI समर्थक रावलपिंडी की ओर कूच कर गए थे। इमरान ने जेल से ही मुनीर पर हमला बोला था। लेकिन मुनीर के शक्तिशाली पद संभालते ही पाक सेना का रुख पूरी तरह सख्त हो गया है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने साफ चेतावनी दी: “इमरान खान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। सेना के खिलाफ भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” यह बयान बताता है कि आने वाले समय में इमरान के लिए हालात और मुश्किल हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया — UN ने जताई चिंता, अमेरिका चुप
असीम मुनीर को CDF बनाने के फैसले का पाकिस्तान में और दुनिया भर में विरोध हो रहा है। UN ने इसे पाकिस्तान का गलत कदम कहा। अमेरिका ने इस विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की है। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से पाकिस्तान का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर होगा और पूरा सैन्य ढांचा “एक वर्दी” के अंदर बंद हो जाएगा। नेवी और एयरफोर्स में भी आंतरिक असंतोष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
अब पाकिस्तान की न्यूक्लियर कमांड का पूरा नियंत्रण एक ही व्यक्ति के हाथ में आ गया है। इससे दो बड़े खतरे पैदा होते हैं: मिसकैलकुलेशन का जोखिम बढ़ेगा।भारत और अफगानिस्तान के साथ तनाव और गहरा हो सकता है। पाकिस्तान के इतिहास में अयूब खान, जिया-उल-हक़ और परवेज़ मुशर्रफ़ जैसे सैन्य शासकों के दौर ने हमेशा देश को अस्थिर किया है। मुनीर की बढ़ी हुई ताकत उसी रास्ते को दोहराने का संकेत देती है।
क्या फिर से पाकिस्तान में सेना का शासन लौट रहा है?
1947 से अब तक पाकिस्तान में सत्ता नागरिक और सैन्य शासन के बीच झूलती रही है। आखिरी बार परवेज़ मुशर्रफ ने 1999 के तख्तापलट में सत्ता हथियाई थी, और अब यह डर फिर से लौट आया है कि: क्या पाकिस्तान की कमान एक बार फिर सेना के हाथों में जा रही है? क्या शहबाज शरीफ सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी? विशेषज्ञों का मानना है कि CDF पद के जरिए पाकिस्तान में सेना की स्थायी पकड़ और मजबूत हो जाएगी, जो आने वाले समय में राजनीति, न्यायपालिका और सुरक्षा ढांचे के संतुलन को पूरी तरह बदल देगी।



