इज़रायल का दावा – ईरान के 75% मिसाइल लॉन्चर तबाह, हमलों में आई भारी कमी
इज़रायल का दावा – ईरान के 75% मिसाइल लॉन्चर तबाह मिसाइल और ड्रोन हमलों में आई बड़ी गिरावट ईरान बोला – यह हार नहीं, नई रणनीति

इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध में हमलों का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है। इसी बीच इज़रायल ने ईरानी हमलों को लेकर बड़ा दावा किया है। इज़रायल का कहना है कि उसने ईरान के इतने मिसाइल लॉन्चर तबाह कर दिए हैं कि अब ईरान पहले की तरह बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले नहीं कर पा रहा है।
मिसाइल हमलों में आई भारी गिरावट
द जेरुसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान ने करीब 480 मिसाइलें दागी थीं। लेकिन 9 मार्च तक यह संख्या घटकर सिर्फ 40 रह गई। यानी अब ईरान पहले की तुलना में केवल लगभग 10 फीसदी मिसाइलें ही दाग पा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इज़रायल और अमेरिका की कार्रवाई में ईरान के करीब 75 फीसदी मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए गए हैं।
300 के करीब लॉन्चर तबाह होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास लगभग 400 से 550 मिसाइल लॉन्चर थे। इनमें से करीब 300 लॉन्चर अब तक तबाह हो चुके हैं। इसी वजह से न सिर्फ मिसाइल हमलों की संख्या घटी है, बल्कि ड्रोन हमलों में भी लगभग 60 फीसदी की कमी आई है।
ईरान ने बताई नई रणनीति
हालांकि ईरान के सूत्र इन दावों से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमलों में कमी की वजह लॉन्चर का नष्ट होना नहीं, बल्कि नई सैन्य रणनीति है। ईरान अब कम संख्या में लेकिन ज्यादा सटीक और घातक हमले करना चाहता है, ताकि युद्ध को लंबा खींचा जा सके और दुश्मन पर ज्यादा दबाव बनाया जा सके।
आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव बनाने की कोशिश
ईरान सिर्फ सैन्य ही नहीं बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका और इज़रायल को घेरने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज की खाड़ी में अगर कारोबारी जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और चिंता बढ़ने की संभावना है।
और घातक मिसाइलों की तैयारी का दावा
ईरान का यह भी दावा है कि उसने अपनी सबसे खतरनाक मिसाइलें अभी इस्तेमाल नहीं की हैं। साथ ही अब मिसाइलों में पहले से ज्यादा विस्फोटक भरे जा रहे हैं। पहले एक मिसाइल में लगभग 400 से 500 किलो विस्फोटक होता था, जबकि अब इसे बढ़ाकर करीब 1 से 2 टन तक किया जा रहा है।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
मिसाइल और ड्रोन हमलों में कमी को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। अमेरिका और इज़रायल इसे अपनी सैन्य सफलता बता रहे हैं, जबकि ईरान इसे नई रणनीति का हिस्सा बता रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव इतना बढ़ पाएगा कि दोनों देश युद्ध को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाएं।



