नेशनल हेराल्ड केस: राहुल–सोनिया गांधी को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, 12 मार्च को सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने राहुल–सोनिया गांधी समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया। ईडी की याचिका पर सुनवाई 12 मार्च को होगी। निचली अदालत के फैसले को एसजी तुषार मेहता ने बड़ी गलती बताया।

Rahul Gandhi: नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर राहुल गांधी, सोनिया गांधी समेत कुल सात आरोपियों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।दरअसल, ईडी ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ईडी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। अब हाईकोर्ट ने ईडी की याचिका पर सभी आरोपियों को नोटिस भेज दिया है।
ईडी का दावा: 50 लाख के बदले 2000 करोड़ की संपत्ति
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में सिर्फ 50 लाख रुपये की राशि के बदले करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की गई। उन्होंने बताया कि जून 2014 में एक व्यक्ति ने इस संबंध में निजी शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर निचली अदालत ने संज्ञान लिया था। बाद में इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। तुषार मेहता ने कहा कि ईडी ने पूरे मामले की गहन जांच की है, जरूरी सबूत जुटाए हैं, कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन किए गए हैं और आरोपियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
कोर्ट में क्या बहस हुई?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सवाल उठाया कि अगर एक पेज की एफआईआर ईडी की जांच का आधार बन सकती है, तो फिर सीआरपीसी की धारा 200 के तहत कोर्ट द्वारा निजी शिकायत पर संज्ञान लेना ईडी की कार्रवाई का आधार क्यों नहीं हो सकता। निचली अदालत ने यह कहकर चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया था कि यदि किसी निजी शिकायत पर कोर्ट ने पहले ही संज्ञान ले लिया है, तो ईडी इस मामले में आगे कार्रवाई नहीं कर सकती। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी से पूछा कि क्या ऐसा कोई मामला अभी लंबित है, जो निजी शिकायत पर आधारित हो और जिस पर कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका हो।
निचली अदालत से हुई बड़ी गलती: तुषार मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निचली अदालत के फैसले को गंभीर गलती बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ इस केस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कई अन्य मामलों पर भी असर पड़ेगा। अगर यह मान लिया जाए कि निजी शिकायत पर संज्ञान लेने के बाद ईडी कोई कार्रवाई नहीं कर सकती, तो इससे जांच एजेंसियों के अधिकार सीमित हो जाएंगे। अब इस मामले पर सभी की नजरें 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



