प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने शाह पर साधा निशाना, गडकरी भी निशाने पर

कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में भी उठाने की कर रही है तैयारी

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने अपना राजनीतिक फोकस बदलते हुए अब 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाया है। संसद के सोमवार से शुरू होने वाले सत्र से पहले कांग्रेस ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है। वहीं, सोशल मीडिया पर ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस वार्ता में कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्रों के आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन आंदोलन का मुद्दा अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। चूंकि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए इस कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तय होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों के हाथ-पैर और पसलियां टूट गईं तथा बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई की योजना बनाने वालों से लेकर उसे लागू करने वालों तक सभी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में भी उठाने की तैयारी कर रही है।

उधर, छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया कि सरकार ने उसकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। संगठन ने देशव्यापी आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, नीट पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या के मामलों में प्रभावित परिवारों को अधिकतम संभव सहायता, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की समीक्षा तथा परीक्षा सुधारों पर चर्चा के आश्वासन के बाद यह निर्णय लिया गया है।

इसी बीच आंदोलन का दायरा शिक्षा के मुद्दे से आगे बढ़कर ई-20 ईंधन नीति तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर इस नीति को लेकर कई टिप्पणियां और मीम वायरल हुए, जिनमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की आलोचना की गई। हालांकि केंद्र सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है तथा देश में उपलब्ध प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलाया जाता।

राजनीतिक टिप्पणीकार तहसीन पूनावाला ने भी ई-20 नीति के विरोध में 31 जुलाई को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। उनकी मांग है कि ई-10 के अनुकूल वाहनों के लिए ई-10 पेट्रोल की उपलब्धता बहाल की जाए, एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल की कीमत कम की जाए और वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों के मालिकों की समस्याओं का समाधान किया जाए।

इस बीच संसद के आगामी सत्र में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े दंड संबंधी संशोधन विधेयक के साथ-साथ छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और ई-20 नीति को लेकर भी तीखी राजनीतिक बहस होने के संकेत हैं।

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