कानपुर: सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की संघर्षभरी कहानी
कम उम्र में पिता को खोया, परिवार की जिम्मेदारी संभाली प्राइवेट नौकरी छोड़ पहले ही प्रयास में बने SDM सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफे के बाद चर्चा में PCS अधिकारी

उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की जीवन यात्रा संघर्ष, जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। मूल रूप से कानपुर नगर के रहने वाले अलंकार ने बेहद कम उम्र में जिंदगी की कठोर सच्चाइयों का सामना किया। महज साढ़े दस साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सबसे बड़े बेटे होने के नाते उनके कंधों पर आ गई। परिवार में चार भाई और एक बहन हैं, जिनकी पढ़ाई और भविष्य की चिंता उन्होंने खुद संभाली।
संघर्ष के बीच पढ़ाई नहीं छोड़ी
कठिन हालात के बावजूद अलंकार ने पढ़ाई से समझौता नहीं किया। वर्ष 1998 में उन्होंने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश स्तर पर 21वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने पहले निजी क्षेत्र में काम करना चुना।
दस साल तक प्राइवेट जॉब कर संभाला परिवार
अलंकार ने आईटी सेक्टर में कंसल्टेंसी की नौकरी की और करीब एक दशक तक निजी क्षेत्र में काम किया। इस दौरान उन्होंने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत किया और छोटे भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की।
नौकरी छोड़कर की PCS की तैयारी
जब परिवार की स्थिति स्थिर हो गई, तब उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला लिया। उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़ दी और यूपीपीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। तैयारी के दौरान किसी पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए उन्होंने पहले से एक साल की सैलरी बचाकर रखी थी।
पहले ही प्रयास में बने SDM
अलंकार की मेहनत सफल रही और उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर ली। 15वीं रैंक हासिल कर वे डिप्टी कलेक्टर (एसडीएम) बने। 2019 बैच के इस अधिकारी ने लखनऊ, उन्नाव और बलरामपुर में एसडीएम के रूप में काम किया और वे अपने स्पष्ट फैसलों व अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं।
कानपुर में आज भी है सादा जीवन
अलंकार का परिवार कानपुर के नौबस्ता इलाके की पोर्श कॉलोनी में रहता है। उनके घर के बाहर आज भी “बजरंगबली निवास” लिखा हुआ है। यही वह घर है, जहां से उन्होंने संघर्ष की शुरुआत की थी। मीडिया के पहुंचने पर परिवार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पड़ोसियों के मुताबिक अलंकार शुरू से ही शांत, मेहनती और अपने काम पर ध्यान देने वाले व्यक्ति रहे हैं। परिवार का किसी भी राजनीतिक दल से कोई जुड़ाव नहीं रहा है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में मौजूदा परिस्थितियों, नए UGC नियमों और अन्य मुद्दों को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया।



