ईरान युद्ध में फंसे ट्रंप! तेल की कीमतें बढ़ीं, अमेरिका में बढ़ी नाराजगी

ईरान युद्ध के बीच ट्रंप पर बढ़ा राजनीतिक दबाव तेल कीमतों में उछाल से अमेरिका और यूरोप में नाराजगी होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ट्रंप ने मांगी वैश्विक मदद

Iran crisis: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के दो हफ्ते बाद भी मिडिल ईस्ट में युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा है। लगातार हो रही मिसाइल और बमबारी से पूरा क्षेत्र तनाव में है। इस संघर्ष का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। तेल और पेट्रोल की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में तेजी आई है, जिससे यूरोप से लेकर अमेरिका तक उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।

 

मीडिया कवरेज से नाराज दिखे ट्रंप

युद्ध को लेकर हो रही खबरों से ट्रंप काफी नाराज नजर आ रहे हैं। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह युद्ध में अमेरिका की हार देखना चाहता है। हालांकि ट्रंप अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि युद्ध शुरू करने की असली वजह क्या थी और इसे खत्म करने की उनकी क्या रणनीति है। बढ़ती तेल कीमतों, वित्तीय बाजारों में गिरावट और संभावित अमेरिकी हताहतों को लेकर जनता में चिंता बढ़ती जा रही है। यहां तक कि उनके कुछ समर्थक भी अब उनकी नीति पर सवाल उठा रहे हैं।

 

अमेरिका के उलझने से रूस को मिल रहा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस संघर्ष में उलझने का फायदा रूस को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने कुछ रूसी तेल शिपमेंट पर लगे प्रतिबंधों को आसान किया है। वहीं तेल की बढ़ती कीमतों ने उन अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को भी कमजोर कर दिया है, जिनका मकसद रूस की यूक्रेन युद्ध क्षमता को सीमित करना था।

 

मिडटर्म चुनाव में बन सकता है बड़ा मुद्दा

आने वाले नवंबर के मिडटर्म चुनावों को देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप की ईरान नीति को बड़ा मुद्दा बना रही है। उनका कहना है कि रिपब्लिकन प्रशासन रोजमर्रा की लागत कम करने के अपने वादे पूरे नहीं कर पाया। नेशनल डेमोक्रेटिक ट्रेनिंग कमिटी के सीईओ केली डिट्रिच का कहना है कि पिछले दो हफ्तों की घटनाएं दिखाती हैं कि ट्रंप प्रशासन के पास कोई ठोस दीर्घकालिक योजना नहीं है और इसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए मांगी मदद

इस बीच ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद की अपील की है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से इस क्षेत्र में जहाज भेजने की बात कही है, ताकि तेल टैंकर सुरक्षित तरीके से गुजर सकें।

 

दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है यहां से

विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया के कुल तेल का करीब पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर ईरान इस रास्ते को बंद करने की कोशिश करता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और दुनिया की नजर इस संघर्ष के अगले कदम पर टिकी है।

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