ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतों पर संकट, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
ईरान पर हमले के बाद तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से क्रूड 80–100 डॉलर तक पहुंचने की आशंका भारत पर तुरंत असर नहीं, लेकिन लंबा संकट पेट्रोल-डीजल महंगा कर सकता है

Iran crisis: अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस जंग का असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ेगा? और अगर क्रूड महंगा हुआ तो क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी? फिलहाल इसका तुरंत असर देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन हालात अगर बिगड़े तो तेल बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव संभव है।
पहले से चढ़ने लगे कच्चे तेल के दाम
युद्ध की आशंका से ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े तो कीमतें 80 से 90 डॉलर तक जा सकती हैं। अमेरिकी थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies (CSIS) का कहना है कि अगर ईरान टैंकरों की आवाजाही रोकता है तो कीमतें 90 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं। वहीं JPMorgan Chase के विश्लेषण के मुताबिक गंभीर बाधा की स्थिति में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी पार कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
तनाव का सबसे बड़ा कारण है Strait of Hormuz। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से हर दिन वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20–30% गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का तेल इसी रास्ते से एशिया—भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया—तक पहुंचता है। अगर यहां रुकावट आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
ईरान भी है बड़ा तेल उत्पादक
ईरान के पास करीब 208–209 अरब बैरल का सिद्ध तेल भंडार है, जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग 12% है। वह रोजाना 3 से 3.5 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। प्रतिबंधों के बावजूद वह 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल रोजाना निर्यात करता रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो इसका सबसे बड़ा असर चीन और एशियाई बाजारों पर पड़ सकता है।
भारत पर कितना असर पड़ेगा?
समाचार एजेंसी Press Trust of India (PTI) के अनुसार, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य कुछ समय के लिए बंद भी होता है तो भारत को तुरंत बड़ी परेशानी नहीं होगी। भारत के पास लगभग 10 दिन का कच्चा तेल और 5–7 दिन का अतिरिक्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल और लगभग आधी गैस आयात करता है। इनमें से करीब 50% तेल और 60% गैस इसी रास्ते से आती है। अगर संकट लंबा चला तो भारत रूस जैसे अन्य देशों से आयात बढ़ाकर स्थिति संभाल सकता है।
क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला टैक्स ढांचे और सरकारी नीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल तेल बाजार में अनिश्चितता है और पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है।



