शाम पांच बजे बहुत सारे घंटाघर, जगह-जगह शाहीनबाग

तेज़ ध्वनि के साथ सड़कों पर इकट्ठा भीड़ ने हांका लगाकर कोरोना को भगाया

पत्रकार नवेद शिकोह कि कलम से

 

21 मार्च का दिन कुछ ख़ास था। वायरस को भगाने के लिए एकजुट देशपर गर्व हो रहा था। अपवाद स्वरूप देश के कुल दो ठिकानों पर ही भीड़ बाकी थी। दिल्ली के शाहीनबाग में और लखनऊ के घंटाघर में। ये भीड़ कोराना से बचाव की हम सब की कोशिश को मुंह चिढ़ा रही थी। देश इन पर क्रोधित था। शाहीनबाग और और घंटाघर पर बैठी भीड़ को हम प्रदर्शनकारी नही भारती समाज का संकमण मान रहे थे। इस अपवाद को छोड़ दीजिए तो 21 मार्च जनता कर्फ्यू के दिन पांच बजे से पहले हमें भारततीय अनुशासन पर गर्व हो रहा था। लग रहा था कि हम कोराना के खिलाफ जंग जीत जायेंगे।

दिन भर के जनता कर्फ्यू के बाद पांच बजा। इटली की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अमल हुआ। मोदी ने कोरोना से लड़ रहे इटली की तर्ज पर भारतीयों जनता से दो गुजायिशें की थी। एक जनता कर्फ्यू का पालन करना। दूसरा कोरोना सेनानियों को प्रोत्साहित करना। उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश मे देशवासियों से कहा था कि जान पर खेल कर कोरोना से लड़ने वालों के प्रोत्साहन और धन्यवाद के शाम पांच बजे अपने-अपने घरों से तालियां और थालियां बजाइयेगा। देश ने प्रधानमंत्री के आह्वान को सिर आंखों पर लिया। अपने-अपने घरों के दरवाजे, खिड़कियों और छतों पर पर प्रोत्साहन रूपी तालियां,, थालियां बजाया बजाकर देश ने कोरोना वायरस से लड़ने में एकजुटता की दलील दी।। डाक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ.. जरुरी सामान के डिलेवरी मैंन.. पत्रकार… पुलिस… इत्यादि का हौसला बढ़ाने के लिए देश के करोड़ों लोगों ने जब अपनी छतों.. दरवाजों..खिड़कियों से तालिया़-थालियां बजानी शुरु कीं तो लगा का हमारी एकजुटता, प्रोत्साहन और हौसला हमें ये जंग जीतने में कामयाब बना देगा।

पांच बजे का समय हमें अहसास दिला ही रहा था कि हमारा हौसला और अनुशासन हमें संकट के समय से निकाल देगा, किंतु इसी समय देश के कुछ अकल के अंधों ने सब गुड़ गोबर कर दिया। ना जाने ये अक़ल के अंधे किस अति अत्साह में थे कि इनका दिमागी लॉकडाउन हो गया। देश के तमाम हिस्सों से ये खबरें और तस्वीरें सामने आने लगीं कि हजारों जगह से लोग झुंड, भीड़ या जुलूस की शक्ल में तालिया.. थालियां… घंटे.. शंख..ढोलक, डिब्बे, पटाखे, ड्रम.. इत्यादि बजाते हुए सड़कों पर उतर आये। यानी कोराना महामारी के खिलाफ 21 मार्च को जनता कर्फ्यू में देशभर के लोगों की तपस्या को शाम पांच बजे ही इन अंधबुद्धि लोगों ने भंग कर दिया। हमने भीड़ से बचने का संकल्प लिया था। सोशल डिस्टेंस बनाना था। इसलिए ही हमें जनता कर्फ्यू के दिन दिल्ली के शाहीनबाग और लखनऊ के घंटाघर में धरने पर बैठी प्रदर्शनकारी औरतों पर एतराज था। लोकतंत्र में धरना देने या किसी सरकार के किसी भी फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने का हर किसी को हक़ है। यदि धरने या प्रदर्शन के आयोजन से आम जनता को परेशानी नहीं हो रही है तो कोई जीवनभर भी धरना दे तो भी उसे असंवैधानिक या गलत नहीं कहा जा सकता।
किंतु महामारी फैलने के खतरे के दौरान जिंन्दगी बचाने के लिए दुनिया भर में सोशल डिस्टेंस कायम किया जा रहा है। झुंड बनाने/ग्रुप में रहने और भीड़ लगाने पर पाबंदियां लगाई जा रही है ऐसे में शाहीनबाग और घंटाघर के धरने को नाजायज, असंवैधानिक और मानवता के खिलाफ ही कहा जायेगा। कहा भी गया। लेकिन दुख तब हुआ जब शाहीनबाग और घंटाघर की तरह देश के हजारों जगहों पर भीड़ के मंजर दिखे।

अब जब हम विश्यशक्ति बनने की बात कर रहे हैं.. विश्वगुरु बनने की बात कर रहे हैं, पांच टिलियन डालर इकॉनमी की बात कर रहे हैं, ऐसे में सड़कों पर निकली इस भीड़ ने हमारी आशाओं को भ्रम साबित कर दिया।

घंटे.. घड़ियाल, शंख.. ड्रम.. ताली..थाली.. पटाखें…बम…और टीन की बड़ी चादरों को बजाते-बजाते सड़कों पर निकली तमाम तस्वीरें ये दलीलें दे रही है कि हमारे ऐसे देशवासियों की शायद ये मंशा थी कि हम सब भीड़ इकट्ठा कर एक साथ टीन, घंटे, थाली, शंख, ढोलक, बाल्टी, थाली.. इत्यादि बजायेंगे तो कोराना ये शोर सुनकर डर के मारे भाग जायेगा।

रो लीजिए ये सब सुनकर। अभी आपको और रोना है।
और तो और देश की इस जाहिल जनता को छोड़िये। जनता कर्फ्यू के दौरान उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में जो इस तरह की जेहालत का मुजाहिरा ( प्रदर्शन) हुआ उसमें नौकरशाह भी शामिल थे। कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें पीलीभीत के जिलाधिकारी, एसपी और तमाम अफसर ऐसे जुलूस में शामिल हैं जो जुलूस हांका लगाने वाले जुलूस जैसे लग रहे हैं। पुराने ज़माने में जब शेर जंगल से निकल के इंसानी आबादी में घुस आता था तब लोग इकट्ठा होकर तेज ध्वनि वाली चीजें बजाते थे, ताकि शेर डर कर भाग जाये.. जंगल चला जाये।

वैसे ही हांका लगाकर कोरोना को भगाने की कोशिश में अफसरों का शामिल होना हमें रुला रहा है। अब कैसे कहें कि जब अमेरिका, चीन और इटली जैसे देश कोरोना वायरस से लड़ने में पस्त हुए जा रहे हैं तो हम इस तरह हांका लगाकर कैसे कोरोना को भगा देंगे !!!!

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