पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बना एयरबेस! दिन-रात फाइटर जेट उतारकर वायुसेना ने दिखाई ताकत
सुल्तानपुर में एक्सप्रेसवे पर उतरे फाइटर जेट दिन-रात अभ्यास से दिखी वायुसेना की ताकत आपदा और युद्ध दोनों में काम आएगा ELF सिस्टम

Purwanchal expressway: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में ऐसा नज़ारा दिखा, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। जहां आमतौर पर गाड़ियां दौड़ती हैं, वहीं अचानक फाइटर जेट उतरने लगे वो भी दिन और रात दोनों समय! सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना ने एक हाई-प्रोफाइल अभ्यास किया, जिसमें सड़क को कुछ ही मिनटों में एयरस्ट्रिप में बदल दिया गया। इस दौरान सुखोई-30 MKI, मिराज-2000 और जगुआर जैसे खतरनाक फाइटर जेट्स ने सफल लैंडिंग की।
कौन-कौन से विमान रहे शामिल?
इस अभ्यास में सिर्फ फाइटर जेट ही नहीं, बल्कि C-295 और AN-32 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी शामिल रहे। इसके अलावा MI-17 V5 हेलीकॉप्टर और गरुड़ कमांडो टीम ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
Purwanchal expressway: सड़क से रनवे बनने का पूरा सिस्टम
इस अभ्यास का मकसद साफ था, आपात स्थिति में कैसे एक आम एक्सप्रेसवे को तुरंत एयरस्ट्रिप में बदला जा सकता है। इसके लिए ट्रैफिक रोकना, सुरक्षा क्लियरेंस और तकनीकी जांच जैसे सभी प्रोसेस को रियल टाइम में टेस्ट किया गया।
Purwanchal expressway: बिना एयरबेस भी मिशन संभव
वायुसेना के मुताबिक, इस तरह के अभ्यास से यह साबित होता है कि जरूरत पड़ने पर बिना एयरबेस के भी मिशन पूरे किए जा सकते हैं। युद्ध या आपदा जैसी स्थिति में यह रणनीति बेहद काम आती है।
क्या होती है ELF?
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) दरअसल सड़क का 3-4 किलोमीटर लंबा हिस्सा होता है, जिसे खासतौर पर इस तरह तैयार किया जाता है कि उस पर फाइटर जेट और बड़े विमान उतर सकें। आम दिनों में यह सड़क की तरह काम करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह एयरस्ट्रिप बन जाता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे टेस्ट
भारत में इससे पहले भी कई अहम परीक्षण हो चुके हैं, 2015: यमुना एक्सप्रेसवे पर पहला रोड रनवे टेस्ट, 2021: PM मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर C-130J की लैंडिंग देखी, 2023-25: अलग-अलग राज्यों में बड़े स्तर पर ELF टेस्ट।
क्यों जरूरी है ये सिस्टम?
Purwanchal expressway: आधुनिक युद्ध में सबसे पहले दुश्मन एयरबेस को निशाना बनाता है। ऐसे में ELF वायुसेना को अलग-अलग जगहों से ऑपरेट करने की ताकत देता है। साथ ही, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं में राहत पहुंचाने में भी यह बेहद कारगर साबित होता है।
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