ED Action On Sanjeev Arora: कंपनी के दावों से घिरी जांच, पंजाब में गरमाई राजनीति
चुनाव से पहले ED की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल कंपनी बोली- एक्सपोर्ट किए गए सभी मोबाइल फोन असली पंजाब में संजीव अरोड़ा और AAP के समर्थन में बढ़ी सहानुभूति

Punjab news: पंजाब में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों पर ED की कार्रवाई अब सिर्फ कानूनी जांच का मामला नहीं रह गई, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक और जनभावना का मुद्दा बन चुकी है। अब संजीव अरोड़ा की कंपनी ने ऑफिशल स्टेटमेंट जारी कर ईडी के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी का कहना है कि जितने भी मोबाइल फोन एक्सपोर्ट किए गए, उनके IMEI नंबर पहले से एक्टिव हैं। इसके बाद ईडी की जांच और दावों को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि चुनाव करीब आते ही विपक्षी नेताओं और आम आदमी पार्टी से जुड़े चेहरों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई अचानक क्यों बढ़ जाती है।
पंजाब में राजनीतिक माहौल गरम
पंजाब के लोगों में यह भावना लगातार मजबूत हो रही है कि केंद्र सरकार अब राजनीतिक लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के सहारे लड़ना चाहती है। लोगों का कहना है कि जो नेता भाजपा के सामने झुकता नहीं, उसके पीछे ED, CBI और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां लगा दी जाती हैं। राज्य में इस कार्रवाई को केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और डराने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
Punjab news: ED ने क्या आरोप लगाए?
ईडी ने अपने दस्तावेजों में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड, कुछ बैंक खातों, कारोबारी लेनदेन और कथित फर्जी मोबाइल फोन निर्यात का जिक्र किया है। एजेंसी का दावा है कि करीब 157 करोड़ रुपये के बोगस मोबाइल एक्सपोर्ट और विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के उल्लंघन की जांच की जा रही है। हालांकि कार्रवाई के तुरंत बाद कंपनी ने 9 मई 2026 को प्रेस बयान जारी कर आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया।
Punjab news: कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने अपने ऑफिशल स्टेटमेंट में कहा कि उसे देश की न्यायपालिका, संविधान और कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और वह हर जांच में सहयोग कर रही है। कंपनी के मुताबिक उसने मई 2023 में मोबाइल फोन निर्यात का कारोबार शुरू किया था, जो भारत सरकार की “Make in India” और PLI योजना के तहत तेजी से बढ़ रहे मोबाइल निर्यात सेक्टर का हिस्सा था।
मोबाइल एक्सपोर्ट को लेकर बड़ा दावा
कंपनी का कहना है कि उसने 44 हजार से ज्यादा असली मोबाइल फोन और मोबाइल उपकरण विदेश भेजे हैं, जिनमें Apple iPhone, AirPods, Samsung और OnePlus जैसे बड़े ब्रांड शामिल हैं। कंपनी के अनुसार हर मोबाइल फोन का IMEI नंबर कस्टम विभाग द्वारा पोर्ट पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्कैन और सत्यापित किया गया था। कंपनी ने कहा कि IMEI स्कैनिंग पूरी तरह डिजिटल और वेरिफाइड प्रक्रिया होती है, जिसे फर्जी साबित करना आसान नहीं है।
विदेशी देशों में एक्टिव हुए फोन
हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने दावा किया कि विदेश भेजे गए ज्यादातर मोबाइल फोन दूसरे देशों में एक्टिव हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि पूरा निर्यात वास्तविक था। कंपनी के मुताबिक Apple और दूसरी कंपनियों ने भी उपकरणों की प्रामाणिकता की पुष्टि की है।
पैसों की हेराफेरी के आरोपों पर जवाब
कंपनी ने फर्जी निर्यात और पैसों की हेराफेरी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि सप्लायर्स को सभी भुगतान GST समेत बैंकिंग चैनलों के जरिए किए गए। निर्यात से आने वाला पैसा भी पूरी तरह बैंकिंग माध्यमों से प्राप्त हुआ। कंपनी के अनुसार हर लेनदेन का रिकॉर्ड मौजूद है और किसी भी स्तर पर कैश या अवैध ट्रांजैक्शन नहीं हुआ।
GST विवाद पर भी दिया स्पष्टीकरण
जीएसटी विवाद को लेकर कंपनी ने कहा कि कुछ सप्लायर कंपनियों पर आरोप लगे थे, लेकिन वह सप्लायर स्तर का मामला था। कंपनी ने खुद को पीड़ित बताते हुए कहा कि उसने इस मामले में लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में FIR दर्ज करवाई थी। कंपनी का कहना है कि विवादित टैक्स राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है और मामला अभी अपीलीय प्राधिकरण में लंबित है।
पंजाब में बढ़ रही सहानुभूति
इस कार्रवाई के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी और संजीव अरोड़ा के प्रति सहानुभूति का माहौल बढ़ता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि पंजाब सम्मान और प्यार की राजनीति को स्वीकार करता है, लेकिन दबाव और डराने की राजनीति का जवाब भी मजबूती से देता है।
भाजपा को हो सकता है नुकसान?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि अगर चुनावों से पहले इसी तरह विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों का दबाव बनाया जाता रहा, तो इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। पंजाब में पहले ही भाजपा का जनाधार सीमित माना जाता है और ऐसी कार्रवाइयों को कई लोग “दिल्ली की राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग” मान रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल क्या?
Punjab news: अब पंजाब में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जांच एजेंसियां पूरी तरह निष्पक्ष हैं या फिर उन्हें राजनीतिक हथियार बना दिया गया है। वहीं कंपनी का कहना है कि सच कानूनी मंचों पर सामने आएगा और उसे “सच्चाई की जीत” पर पूरा भरोसा है।
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