Pooja Pal की हत्या! तो अखिलेश जिम्मेदार? डिंपल यादव ने दिया BJP को वोट.. दो पन्नो के लेटर से यूपी में भूचाल!

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने पार्टी नेतृत्व पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। अखिलेश यादव द्वारा 9 दिन पहले निष्कासन के बाद पूजा पाल ने शुक्रवार को एक्स (X) पर दो पन्नों का लेटर पोस्ट कर सपा के भीतर की राजनीति, परिवारवाद और दोहरे चरित्र पर गंभीर सवाल उठाए।

“सपा में पिछड़े-दलित दूसरे दर्जे के नागरिक”

पूजा पाल ने अपने पत्र की शुरुआत सपा की संरचना पर सवाल उठाते हुए की। उन्होंने लिखा—

“समाजवादी पार्टी में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित हमेशा दूसरे दर्जे के नागरिक माने जाते हैं। पहले दर्जे के नागरिक सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम ही होते हैं।”

उनका कहना है कि पार्टी हमेशा खुद को सबका प्रतिनिधि बताती है, लेकिन असलियत यह है कि जातिगत और धार्मिक आधार पर भेदभाव गहराई से मौजूद है।

“पति के हत्यारों को सजा दिलाने में अखिलेश असफल”

पूजा पाल ने अपने पति और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता रूपेश पाल की हत्या का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने लिखा—

“मैंने पूरी कोशिश की कि अखिलेश यादव मेरे पति के हत्यारों को सजा दिलाने में मदद करें, लेकिन उन्होंने कभी इस दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया।”

उनके मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने न्याय दिलाने का सिर्फ वादा किया लेकिन हकीकत में सपा की राजनीति उनके दर्द से कहीं ऊपर रही।

“डिंपल यादव ने BJP को वोट दिया” – पूजा पाल का सनसनीखेज दावा

पूजा पाल का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप डिंपल यादव पर रहा। उन्होंने कहा कि खुद अखिलेश यादव की पत्नी और कन्नौज से सांसद रह चुकीं डिंपल यादव ने भी बीजेपी को वोट दिया था।

“आज सपा नेतृत्व मुझे भाजपा से नजदीकी रखने का आरोप लगाकर निशाना बना रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि डिंपल यादव ने खुद बीजेपी को वोट दिया था।”

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी को वोट देना इतनी बड़ी गलती है तो फिर सपा परिवार के भीतर यह दोहरा मापदंड क्यों?

“मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति में पिछड़े और दलितों का कोई स्थान नहीं”

पूजा पाल ने साफ कहा कि सपा आज भी केवल मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति में उलझी है और इस राजनीति में पिछड़े और दलितों की कोई अहमियत नहीं। उन्होंने लिखा—

“सपा मुस्लिम नेताओं के लिए खुला दरवाज़ा है, लेकिन जब बात पिछड़े और दलित कार्यकर्ताओं की आती है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।”

उनके मुताबिक, यही वजह है कि सपा लगातार अपने परंपरागत वोटरों का विश्वास खो रही है और भाजपा को फायदा पहुंचा रही है।

“निष्कासन से मुझे फर्क नहीं पड़ता”

पत्र के अंत में पूजा पाल ने लिखा कि पार्टी से निष्कासन से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना है कि यह निर्णय पहले ही तय था और यह सिर्फ एक औपचारिकता थी।

“सपा से बाहर निकलना मेरे लिए किसी सजा जैसा नहीं है, बल्कि यह मेरी आज़ादी है।”

राजनीतिक हलचल तेज

पूजा पाल के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई हलचल मच गई है। खासकर डिंपल यादव पर लगाया गया बीजेपी को वोट देने का आरोप, सपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान आने वाले चुनावी मौसम में विपक्षी दलों के लिए बड़ा हथियार बन सकता है।

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