बड़ी खबर: FIR हुई तो PM-CM और मंत्रियों को छोड़नी पड़ सकती है कुर्सी, Amit Shah आज लाने वाले हैं अनोखा बिल !

नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री ऐसे गंभीर अपराधों में गिरफ्तार होते हैं, जिनमें कम से कम 5 साल की सजा हो सकती है और वे लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन पद से हटाना अनिवार्य होगा। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को संसद में तीन अहम बिल पेश करेंगे।
क्यों ज़रूरी हुआ यह कानून?
दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब नीति केस में गिरफ्तारी के बाद भी महीनों तक पद पर बने रहे। वहीं, तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी 241 दिन जेल में रहने के बावजूद मंत्री बने रहे। इन घटनाओं ने संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की कानूनी जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए थे।
संसद में पेश होने वाले तीन बड़े बिल
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गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025
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अभी तक केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री या मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने के बाद हटाने का कोई प्रावधान नहीं है।
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इस बिल से 1963 के गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट की धारा 45 में संशोधन कर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाएगी।
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130वां संविधान संशोधन बिल 2025
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वर्तमान संविधान में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों को गिरफ्तारी की स्थिति में पद से हटाने का प्रावधान नहीं है।
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नए संशोधन से अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में बदलाव होगा।
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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025
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2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
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अब संशोधन के बाद यहां भी गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन हिरासत के बाद मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाया जा सकेगा।
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ऑनलाइन गेमिंग पर भी सख्ती
केंद्र सरकार लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बैन बिल भी ला सकती है।
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इसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग, विज्ञापन और उकसाने पर 3 साल तक की कैद या 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
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कैबिनेट ने इस बिल को मंगलवार को मंजूरी दी है।
लोकतंत्र और सुशासन पर असर
सरकार का कहना है कि इन बिलों से लोकतंत्र और सुशासन की साख मजबूत होगी। अब तक केवल दोषी ठहराए जाने पर ही नेता पद से हटाए जाते थे, लेकिन गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार नेताओं के पद पर बने रहने से सियासी और कानूनी विवाद खड़े होते रहे हैं।
कौन-कौन से अपराध आएंगे दायरे में?
बिल में अपराधों की सूची स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन इसमें ऐसे मामले शामिल होंगे जिनमें कम से कम 5 साल की सजा हो। यानी हत्या, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध इसके दायरे में आएंगे।



