विधानसभा सत्र में हुआ BJP vs BJP, भाजपा विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरा, दाग दिए 87 सवाल !

गैरसैंण (उत्तराखंड)। उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र गैरसैंण में शुरू हुआ। लेकिन पहले ही दिन चौंकाने वाला नज़ारा देखने को मिला। यहां भाजपा विधायकों ने अपनी ही सरकार को सवालों की झड़ी लगाकर घेरा, जबकि विपक्ष की मुख्य पार्टी कांग्रेस बेहद सुस्त नज़र आई।
भाजपा विधायकों की सवालों की बौछार
विधानसभा सचिवालय के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा विधायकों ने पहले दिन कुल 87 सवाल पूछे। इनमें प्रीतम सिंह पंवार सबसे आगे रहे, जिन्होंने 21 प्रश्न उठाए। महेश जीना ने 18 सवाल, जबकि डॉ. प्रमोद नैनवाल ने 13 सवाल पूछकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
इसके अलावा रेनू बिष्ट, विनोद कंडारी, खजान दास, पार्वती दास, सरिता आर्य, फकीरराम टम्टा, आशा नौटियाल और प्रदीप बत्रा ने भी राज्य की नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर तीखे सवाल किए।
कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन
कांग्रेस की ओर से पूछे गए सवालों की संख्या बेहद कम रही। मयूख महर ने 8 सवाल, उपनेता भुवन कापड़ी ने 4 सवाल, ममता राकेश ने 3, वीरेंद्र जाती और फुरकान अहमद ने 2-2, जबकि काजी निजामुद्दीन ने केवल 1 सवाल पूछा। विपक्ष की इस सुस्ती ने विधानसभा में उनकी सक्रियता और राजनीतिक संघर्ष में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए।
विपक्ष की मौजूदगी पर सवाल
पहले दिन की कार्यवाही में साफ दिखाई दिया कि जहां भाजपा विधायक अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करने में सक्रिय रहे, वहीं कांग्रेस विधायक सत्र में कहीं खोए-से लगे। इससे सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों की कार्यशैली पर नई बहस शुरू हो गई।
भाजपा की रणनीति और बढ़ता दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा विधायकों ने यह रणनीति बनाकर अपनाई कि सरकार की जवाबदेही को सुनिश्चित किया जाए और विधानसभा में अपनी सक्रियता भी दिखाई जाए। सवालों की बड़ी संख्या ने सत्ता पक्ष के भीतर ही राजनीतिक तनाव और जवाबदेही की मांग को और बढ़ा दिया है।



