नेपाल के दार्चुला में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, घरों से बाहर निकले सहमे लोग
नेपाल के दार्चुला जिले में रविवार सुबह 4.1 तीव्रता के भूकंप से हड़कंप मच गया और लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का केंद्र तपोवन इलाके में जमीन के भीतर था, हालांकि राहत की बात रही कि कहीं से जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और ओडिशा के कालाहांडी में भी इसी तरह के भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं।

Nepal earthquake: नेपाल के पर्वतीय जिले दार्चुला में रविवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब भूकंप के तेज झटकों ने धरती को हिला कर रख दिया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई है। झटके महसूस होते ही लोग जान बचाने के लिए अपने घरों और दफ्तरों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे, जिससे इलाके में काफी देर तक दहशत का माहौल बना रहा।
दार्चुला का तपोवन रहा भूकंप का केंद्र
नेपाल के भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर आया था। भूकंप का मुख्य केंद्र दार्चुला जिले के तपोवन इलाके में जमीन के भीतर गहराई में स्थित था। राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी किसी जान-माल के नुकसान की कोई अप्रिय खबर नहीं मिली है।
Nepal earthquake: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भी हिली थी जमीन
इससे पहले बीते शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भी कुदरत का ऐसा ही डर देखने को मिला था। वहां सुबह करीब 9 बजकर 57 मिनट पर 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। जमीन से 10 किलोमीटर नीचे केंद्र होने के बावजूद वहां भी लोग एहतियात के तौर पर काफी देर बाहर रहे।
Nepal earthquake: ओडिशा के कालाहांडी में भी हुई थी हलचल
बीते 29 अप्रैल को ओडिशा के कालाहांडी जिले में भी 4.1 की समान तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। यह भूकंप शाम के समय आया था, जिसका असर भवानीपटना और जूनागढ़ जैसे कई इलाकों में देखा गया। प्रशासन ने उस समय भी स्पष्ट किया था कि भूकंप से किसी प्रकार की बड़ी क्षति नहीं हुई थी।
क्यों बार-बार कांप रही है हिमालयी क्षेत्र की धरती
Nepal earthquake: विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल और हिमालयी बेल्ट टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण बेहद संवेदनशील हैं। भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच होने वाला टकराव इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह है। लगातार आ रहे ये छोटे झटके किसी बड़े खतरे का संकेत भी हो सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस पर नजर रख रहे हैं।
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