आपकी खरीदारी पर सरकार की नज़र!

पहली बार होगा राष्ट्रीय रिटेल उपभोग सर्वे

अब सरकार यह भी जानना चाहती है कि देश का उपभोक्ता क्या खरीद रहा है, कितना खरीद रहा है और उसकी खरीदारी की आदतों में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार पहली बार राष्ट्रीय रिटेल उपभोग सर्वे (National Retail Consumption Survey) शुरू करने की तैयारी में है।

नई दिल्ली, 14 जुलाई। अगर आप यह सोचकर निश्चिंत थे कि आपकी खरीदारी सिर्फ आपके बैंक खाते और परिवार को पता है, तो अब सावधान हो जाइए। सरकार देश में पहली बार राष्ट्रीय रिटेल उपभोग सर्वे लाने की तैयारी कर रही है। यानी अब यह भी जानने की कोशिश होगी कि आप महीने में कितनी बार ऑनलाइन “कार्ट” भरते हैं, कितनी बार “बाय नाउ” दबाते हैं और कितनी बार सिर्फ कीमत देखकर ऐप बंद कर देते हैं।

सूत्रों की मानें तो सर्वे यह भी बता सकता है कि महंगाई के दौर में जनता दाल कम और ऑफर ज्यादा तलाश रही है। यह भी पता लगाया जा सकता है कि घर में पांच किलो चावल आने से पहले पांच नए मोबाइल कवर कैसे पहुंच जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ता की सबसे बड़ी आदत है—”जरूरत एक की, खरीदारी तीन की।” त्योहार हो तो “एक खरीदो, दो मुफ्त पाओ” के चक्कर में घर का स्टोर रूम पहले भरता है और बाद में याद आता है कि लेने क्या निकले थे।

सर्वे में अगर ऑनलाइन खरीदारी भी शामिल हुई तो कई लोगों की असली प्रतिभा सामने आ सकती है। जैसे हर रात 11:59 बजे फ्लैश सेल का इंतजार करना, दस ई-कॉमर्स ऐप में एक ही सामान की कीमत मिलाना और आखिर में “अभी नहीं, बाद में खरीदेंगे” लिखकर मोबाइल बंद कर देना।

उधर गृहिणियों का कहना है कि अगर सरकार सचमुच खरीदारी की आदतें समझना चाहती है तो पहले यह पता लगाए कि “रसोई का बजट” हर महीने कैसे बनता और कैसे बिगड़ता है। वहीं नौकरीपेशा लोगों का दावा है कि महीने की पहली तारीख को वे “प्रीमियम ग्राहक” होते हैं और 25 तारीख आते-आते “विंडो शॉपर” बन जाते हैं।

हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि सर्वे का मकसद केवल उपभोक्ता व्यवहार को समझना है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग मजाक में पूछ रहे हैं—”कहीं अगला सवाल यह तो नहीं होगा कि महीने में कितनी बार ‘सेल देखकर’ जरूरत से ज्यादा खरीदारी की?”

आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय रिटेल उपभोग सर्वे पहली बार होने जा रहा है और प्रस्तावित सर्वे के जरिए देशभर के खुदरा बाजार से वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक बिक्री से जुड़े आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार उपभोक्ताओं की खरीदारी के रुझान, खर्च के पैटर्न और बदलती मांग का आकलन करेगी, ताकि आर्थिक नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक सटीक बनाया जा सके।

दरअसल, सरकार उपभोग संबंधी जानकारी के लिए मुख्य रूप से हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (एचसीईएस) पर निर्भर रहती है, जिसमें परिवारों से उनके खर्च के बारे में जानकारी ली जाती है। नया रिटेल उपभोग सर्वे इससे अलग होगा, क्योंकि इसमें सीधे खुदरा बिक्री के स्तर पर वास्तविक खरीदारी के आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे बाजार में मांग की स्थिति का अधिक वास्तविक और अद्यतन आकलन संभव होगा। बताया जा रहा है कि सर्वे में किराना, खाद्य सामग्री, दवाइयों, कपड़ों, घरेलू उपयोग के सामान, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और अन्य प्रमुख खुदरा श्रेणियों की बिक्री का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के उपभोग पैटर्न, नकद और डिजिटल भुगतान के रुझानों तथा बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं का भी विश्लेषण किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में संगठित खुदरा कारोबार, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान के तेजी से विस्तार के बीच उपभोक्ता व्यवहार में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे में यह सर्वे देश में खुदरा क्षेत्र का पहला व्यापक आधिकारिक डेटाबेस तैयार करेगा, जिससे सरकार को महंगाई, उपभोक्ता मांग, क्षेत्रवार खपत और आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी।

सूत्रों के अनुसार, सर्वे की कार्यप्रणाली और क्रियान्वयन की रूपरेखा पर अंतिम स्तर पर विचार किया जा रहा है। इसकी शुरुआत और विस्तृत कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा उपयुक्त समय पर की जाएगी।

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