पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम: भवानीपुर में ममता बनर्जी की 15 हजार वोटों से बड़ी हार

भवानीपुर के महामुकाबले में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को दी करारी मात ममता बनर्जी के गढ़ में खिला कमल, 15 हजार से ज्यादा वोटों से हारीं मुख्यमंत्री बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, टीएमसी की शिकस्त के बाद बदले समीकरण

Mamta defeat news: पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों में इस बार ऐसा उलटफेर हुआ है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। राज्य की सत्ता पर काबिज रहने वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं। कोलकाता की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हार का स्वाद चखना पड़ा है। उन्हें बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी ने 15 हजार 105 वोटों के अंतर से हरा दिया है। बंगाल की राजनीति में इसे एक नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

सुवेंदु ने ममता के गढ़ में लगाई सेंध

भवानीपुर विधानसभा सीट को हमेशा से ममता बनर्जी का मजबूत किला माना जाता रहा है। वह यहां से पहले भी चुनाव जीतती आई हैं, इसलिए इस हार को टीएमसी और ममता के व्यक्तिगत राजनीतिक करियर के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। गिनती के दौरान दोनों नेताओं के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली और कई बार आंकड़े ऊपर-नीचे हुए। लेकिन आखिरी के राउंड्स में सुवेंदु अधिकारी ने ऐसी बढ़त बनाई कि ममता बनर्जी पिछड़ती चली गईं।

Mamta defeat news: वोटों के गणित में भारी अंतर

अगर आंकड़ों की बात करें तो सुवेंदु अधिकारी को कुल 73 हजार 917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी के खाते में सिर्फ 58 हजार 812 वोट ही आए। इस सीट पर मुकाबला पूरी तरह से इन दोनों दिग्गजों के बीच ही सिमटा रहा। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तीसरे और चौथे नंबर पर रहे उम्मीदवारों को बहुत ही कम वोट मिले। इस सीधी लड़ाई में सुवेंदु अधिकारी ने बाजी मारते हुए ममता बनर्जी को पराजित कर दिया।

टीएमसी की हार के पीछे की बड़ी वजह

Mamta defeat news: जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में इस बार सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति और बीजेपी की आक्रामक चुनावी रणनीति ने टीएमसी का खेल बिगाड़ दिया। बीजेपी ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर अपने संगठन को मजबूत किया और बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया, उसका असर नतीजों में साफ दिख रहा है। स्थानीय मुद्दों ने भी इस बार चुनाव के समीकरणों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

 

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