कानपुर में आग का तांडव: कहीं जिंदा जला नौजवान, तो कहीं धमाकों से दहली बस्ती!

कानपुर में काल बनी आग; घाटमपुर में एक युवक की दर्दनाक मौत, भाइयों की तीन दुकानें स्वाहा! बजरिया में हाइड्रोजन सिलेंडरों के धमाकों से दहली बस्ती; 6 कारें जलकर कंकाल, सड़क पर आए परिवार। शॉर्ट सर्किट ने छीनी कई घरों की खुशियां; नेताओं का आश्वासन, पर क्या भरपाई होगी तबाही?

Kanpur fire: यूपी के औद्योगिक शहर कानपुर से आज जो तस्वीरें सामने आईं, वो किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं थीं। शहर के दो अलग-अलग कोनों में ‘शॉर्ट सर्किट’ काल बनकर आया। कहीं एक ही परिवार के तीन भाइयों के सपने जलकर राख हो गए, तो कहीं हाइड्रोजन सिलेंडरों के धमाकों ने पूरी बस्ती को श्मशान जैसा सन्नाटा थमा दिया।

पहली घटना: घाटमपुर में मौत की ‘दीना मार्केट’

घाटमपुर के दीना मार्केट में सुबह जब लोग अपनी दुकानें खोलकर रोजी-रोटी की उम्मीद कर रहे थे, तभी धुआं उठा और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया। एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: ये आग तीन दुकानों में लगी और बदकिस्मती देखिए, ये तीनों दुकानें एक ही परिवार के सगे भाइयों की थीं।जिंदा जल गया युवक: तबाही के इस मंजर के बीच सबसे दर्दनाक खबर ये आई कि एक युवक दुकान के अंदर ही फंस गया। जब तक उसे निकालने की कोशिश होती, आग की लपटों ने उसे घेर लिया और वो जिंदा जल गया। लाखों का सामान तो खाक हुआ ही, उस मां की गोद भी उजड़ गई जिसका लाल इस आग की भेंट चढ़ गया।

Kanpur fire: दूसरी घटना: बजरिया में ‘आग का गोला’ बनीं गाड़ियां

थाना बजरिया के पास बड़ी ईदगाह का इलाका आज धमाकों से गूंज उठा। यहाँ एक कार गैराज में लगी आग ने वो विकराल रूप लिया कि 30-30 मीटर ऊंची लपटें आसमान चूमने लगीं।सिलेंडरों के धमाके और दहशत: गैराज में रखे इंजन ऑयल और हाइड्रोजन सिलेंडरों ने जब आग पकड़ी, तो बम जैसे धमाके हुए। इन धमाकों से न सिर्फ गैराज बल्कि पास की बस्ती के 4 मकान भी स्वाहा हो गए। सड़क पर आए 4 परिवार: गैराज में खड़ी 6 चमचमाती कारें अब लोहे का कंकाल बन चुकी हैं। लेकिन सबसे ज्यादा दिल तोड़ने वाली बात उन गरीब परिवारों की है, जिनकी जिंदगी भर की कमाई, कपड़े और गृहस्थी इन लपटों ने निगल ली। आज 4 परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

 सियासत और आश्वासन: क्या मिलेगा मुआवजा?

Kanpur fire: हादसे की खबर मिलते ही पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों के आंसू पोंछते हुए वादा किया है कि वो DM से मिलकर सरकारी मदद दिलवाएंगे। लेकिन सवाल वही है, क्या सरकारी फाइलें इन गरीबों के आशियाने फिर से बसा पाएंगी?

 

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