बड़ी खबर: पूजा में इस्तेमाल होने वाला चंदन नकली, यूपी में स्टिंग ऑपरेशन से पर्दाफाश! केमिकल से डाली खुशबू..

Dainik Bhaskar की एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि कन्नौज-इत्र बाजार में बड़े पैमाने पर नकली चंदन बनाया और बेचा जा रहा है। रिपोर्टर ने खुद को व्यापारी बताकर चार कारखानों का स्टिंग किया — कैमरे में दर्ज बातचीत और सैंपल से यह स्पष्ट होता है कि खिन्नी, महुआ, यूकेलिप्टस व अन्य सस्ते लकड़ियों पर रसायन/परफ्यूम स्प्रे करके चंदन जैसा माल तैयार कर दिया जाता है और बाजार में असली चंदन के दाम पर बेचा जा रहा है। रिपोर्ट का पूरा क्रेडिट Dainik Bhaskar को दिया गया है।


क्या कहा Dainik Bhaskar की जांच ने? — स्टिंग का सार

Dainik Bhaskar के स्टिंग के अनुसार:

  • कन्नौज में करीब 100 कारखाने/वर्कशॉप ऐसे हैं जहाँ नकली चंदन बनाने की प्रक्रिया चलती है।

  • रिपोर्टर ने व्यापारी बनकर चार अलग-अलग कारखानों में इस धंधे का सीधा सबूत लिया — बातचीत, सैंपल और कीमतें कैमरे में कैद हैं।

  • मालिक और कामगार खुलेआम बताते हैं कि खिन्नी/महुआ/यूकलिप्टस जैसी लकड़ियों पर चंदन के परफ्यूम स्प्रे कर दिया जाता है; लेमिनेशन और पैकिंग के बाद वही लकड़ी बाजार में चंदन के नाम पर बिक जाती है।


प्रोसेस: नकली चंदन कैसे बनता है — प्रत्यक्ष उद्धरण के साथ विवरण

स्टिंग में सामने आई बातचीत से ज्यों-का-त्यों:

  • भोला शर्मा (कारखाना मालिक): “यह लकड़ी होती है खिन्नी की। इसमें कोई महक नहीं होती। इसमें कंपाउंड मिलाया जाता है चंदन का। फिर यह महकती है चंदन जैसी।

  • पिंटू वर्मा (युवा व्यापारी): “हवन में डालते हैं। हवन लकड़ी चंदन। डायरेक्ट थोड़ी चंदन लिख देंगे।स्प्रे सही होना चाहिए… कम्पाउंड बढ़िया लगा देंगे, थोड़ा महंगा लगा देंगे।

  • अनुज मिश्रा (दूसरा विक्रेता): “(तेल निकालकर) ये लीजिए… सूंघो आप।… ये 100 रुपए पड़ेगी। लेमिनेशन के साथ।

ये बातें दर्शाती हैं कि सस्ते कच्चे माल पर रसायन/परफ्यूम और लेमिनेशन कर के ऐसा माल तैयार किया जा रहा है जो असली चंदन की तरह महकता और दिखता है।


दाम-डायनेमिक्स — असली बनाम नकली (Dainik Bhaskar के ग्राफिक के मुताबिक)

(कन्नौज की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट और ग्राफिक के आधार पर)

  • असली चंदन (5 इंच के टुकड़े) — ₹4,000 से ₹6,000/किलो तक।

  • खिन्नी की लकड़ी पर चंदन का स्प्रे व लेमिनेशन — ≈ ₹250/किलो (रोल्ड/टुकड़ा)।

  • खिन्नी की लकड़ी के पाउडर + केमिकल स्प्रे — ≈ ₹100/किलो।

  • महुआ की लकड़ी पर स्प्रे + लेमिनेशन — ≈ ₹70/किलो।

  • यूकेलिप्टस की लकड़ी + लेमिनेशन — ≈ ₹100/किलो।

  • महुआ की लकड़ी + स्प्रे + बॉक्स पैक — ≈ ₹120/किलो।

  • लाल रंग की लकड़ी + केमिकल स्प्रे + लेमिनेशन — ≈ ₹250/किलो।

नतीजा: स्टिंग कारखानों में बने माल की थोक कीमतें असली चंदन के कई-गुना सस्ती हैं, जबकि बाजार में पैकेट/ब्रांडिंग के साथ इन्हें ₹4,000–₹5,000/किलो तक भी ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है — यानी उपभोक्ताओं को भारी धोखा।


बाजार-चाल और पैकेजिंग के चारा — ऑनलाइन व रिटेल फ्रंट पर धोखा

स्टिंग टीम ने खुद कहा-समझकर खरीदी के बाद पाया कि दुकानों पर वही टुकड़े ₹160–₹5000/किलो तक दिखाए जा रहे हैं, और दुकानदार अक्सर “सरकारी मुहर/ब्रांड” का हवाला देकर असली बताने की कोशिश करते हैं। व्यापारी यह भी कहते पाए गए कि बिल काटकर, मुहर लगाकर और परफ्यूम/लेबलिंग कर के माल दूर-दूर भेजा जाता है — रास्ते में पकड़े जाने का डर कम रहता है।


सार्वजनिक व धार्मिक असर — हवन/पूजा में इस्तेमाल का सवाल

स्टिंग में व्यापारी स्पष्ट करते दिखे कि यह माल पूजा-हवन में भी डाला जाएगा और “जलने पर चंदन जैसी खुशबू” देगा। इससे दो प्रमुख जोखिम बनते हैं:

  1. उपभोक्ता-धोखा: धार्मिक अनुष्ठानों में असली चंदन के भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व का शोषण।

  2. स्वास्थ्य-जोखिम: केमिकल स्प्रे व लेमिनेशन से उत्पन्न धुआं/रियैक्शन — जिससे संवेदनशील लोगों पर असर पड़ सकता है (यहाँ फोरेंसिक-टेस्ट की आवश्यकता)।


Dainik Bhaskar का स्टिंग और साक्ष्य — क्या मजबूत है?

Dainik Bhaskar ने कैमरा-फुटेज, प्रत्यक्ष बातचीत और सैंपल एकत्र किए — कारोबारी खुलकर प्रक्रिया और रेट बताते दिखे। इन्वेस्टिगेशन-सामग्री निम्नलिखित है:

  • चार कारखानों में इन-हाउस स्टिंग रिकॉर्डिंग।

  • कारखाने मालिक/कर्मचारियों के बयान (भोलाशर्मा, पिंटू वर्मा, संदीप शर्मा, अनुज मिश्रा आदि)।

  • तैयार सैंपल व पैकिंग का प्रत्यक्ष अवलोकन।
    ये साक्ष्य उपभोक्ता-धोखे और आपूर्ति-शृंखला में कमियां दिखाते हैं, इसलिए आधिकारिक जांच के संकेत मजबूत हैं।


क्या होने की मांग होनी चाहिए?

Dainik Bhaskar के खुलासे के बाद आवश्यक कदमें हो सकती हैं:

  1. फूड/फार्मा/इंडस्ट्री व केमिकल विभाग द्वारा फोरेंसिक जाँच — नकली चंदन पर प्रयुक्त तेल/रसायन की लैब जाँच।

  2. व्यापार-लाइसेंस/उत्पादन परमिट की जांच — कितने कारखाने वैध हैं और कौन-कौन से रजिस्ट्रेशन कराए गए।

  3. बाज़ार-निगरानी और कस्टमर्स-एडवाइज़री — उपभोक्ताओं को सचेत किया जाए कि बिना प्रमाण के महंगे चंदन न खरीदें।

  4. कठोर कानूनी कार्रवाई — अगर धोखाधड़ी सिद्ध होती है तो फर्जी ब्रांडिंग/फेक लेबलिंग व उपभोक्ता-वंचना के आधार पर मुक़दमाबाजी।


सांस्कृतिक भरोसा और कन्फ्यूज़न — पारदर्शिता ज़रूरी

कन्नौज जैसे पारंपरिक इत्र-हब में नकली चंदन का धंधा न केवल आर्थिक घोटाला है, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक भरोसे को भी चोट पहुंचाता है। Dainik Bhaskar की इन्वेस्टिगेशन ने यह दिखाया कि बड़े पैमाने पर सप्लाई-चेन में धोखा संभव है — इसलिए प्रशासन, कस्टमर्स और ट्रेड-बॉडी को मिलकर फोरेंसिक जाँच, कड़े रेगुलेशन और पारदर्शी मार्केटिंग लागू करनी चाहिए।

क्रेडिट: यह रिपोर्ट Dainik Bhaskar की इन्वेस्टिगेशन और स्टिंग फुटेज पर आधारित है — सभी प्रमुख खुलासों का श्रेय Dainik Bhaskar को दिया जाता है।

Full Dainik Bhaskar Report -> https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/kannauj/news/up-kannauj-factory-fraud-nakli-chandan-sandalwood-agarbatti-dhoop-batti-136025417.html

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