रेलवे कर्मचारी को सरेराह गोलियों से भूना, पार्किंग और जमीन के धंधे में छिपी है मौत की वजह?
"जमशेदपुर में फिर बरसा बारूद: रेलवे लॉबी गेट पर कर्मचारी का सरेआम कत्ल, दहशत में पूरा इलाका!" "रेलवे की नौकरी और जमीन का खेल; क्या GK मीणा की जान लेने के पीछे कोई बड़ा 'सफेदपोश' है?" "बाइक सवार आए और सीने में उतार दी गोलियां; टाटा की सड़कों पर कानून का जनाजा निकाल रहे अपराधी!"

Jamshedpur murder: लोहनगरी में अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस की फाइलें सिर्फ जांच के नाम पर सफेद हो रही हैं। रविवार की रात जब शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब बागबेड़ा थाना क्षेत्र के रेलवे लॉबी गेट के पास गोलियों की तड़तड़ाहट ने सन्नाटा चीर दिया। बाइक पर आए दो गुर्गों ने रेलवे कर्मचारी जीके मीणा को निशाना बनाया और सीने में पीतल उतारकर रफूचक्कर हो गए।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
गोली लगते ही मौके पर भगदड़ मच गई। खून से लथपथ मीणा जमीन पर गिरे तड़प रहे थे। लोग भागे-भागे आए, उन्हें उठाकर रेलवे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने देखते ही कह दिया, “खेल खत्म हो चुका है।” मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
Jamshedpur murder: सिर्फ रेलवे की नौकरी या जमीन का ‘खूनी’ चक्कर?
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश जो इशारा कर रही है, वो बेहद चौंकाने वाला है। जीके मीणा सिर्फ रेलवे के कर्मचारी नहीं थे, बल्कि जमीन के धंधे में भी उनका अच्छा-खासा दखल था। चर्चा है कि रेलवे पार्किंग के समतलीकरण का काम और जमीन से जुड़े कुछ पुराने विवाद ही उनकी मौत का वारंट बने हैं। क्या यह आपसी रंजिश है या फिर ‘जमीन माफिया’ के बीच की गैंगवार?
Jamshedpur murder: पुलिस के हाथ लगा एक खोखा
सिटी एसपी ललित मीणा खुद दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। जमीन पर पड़ा एक खोखा इस बात की गवाही दे रहा है कि हमलावर पूरी तैयारी और ‘फुल प्रूफ’ प्लानिंग के साथ आए थे। फिलहाल आसपास के CCTV कैमरे खंगाले जा रहे हैं, लेकिन सवाल वही है, आखिर कब तक जमशेदपुर की सड़कें ऐसे ही खून से लाल होती रहेंगी?
न्यूज़ नशा का सीधा सवाल
Jamshedpur murder: क्या वर्दी का खौफ खत्म हो चुका है? अगर सरेराह एक सरकारी कर्मचारी सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता अपनी हिफाजत की उम्मीद किससे करे?
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