Israel Iran War: जंग का असर आसमान पर, हजारों फ्लाइट्स रद्द
मिडिल ईस्ट में जंग का असर अब आसमान पर साफ दिखाई दे रहा है। तीन दिनों में हजारों उड़ानें रद्द, दुबई-दोहा जैसे बड़े हब प्रभावित। भारत समेत दुनियाभर के यात्री एयरपोर्ट्स पर फंसे, विमानन उद्योग पर गहराया संकट।

अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई का असर अब जमीन से ज्यादा आसमान में दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के कारण दुनियाभर में हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हो गई है। हजारों यात्री अलग-अलग देशों के एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं और सैकड़ों अतिरिक्त उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। कोविड महामारी के बाद विमानन उद्योग के लिए यह सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
लगातार तीन दिन में हजारों उड़ानें रद्द
फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म FlightAware के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें रद्द की जा चुकी थीं। शनिवार को करीब 2,800, रविवार को 3,156 और सोमवार सुबह तक 1,239 फ्लाइट्स कैंसिल, वहीं Flightradar24 के अनुसार ईरान, इराक, कुवैत, इजरायल, बहरीन, यूएई और कतर के ऊपर का हवाई क्षेत्र लगभग खाली नजर आ रहा है।
दुबई, अबू धाबी और दोहा पर सबसे ज्यादा असर
मिडिल ईस्ट के बड़े एयरपोर्ट इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। Dubai International Airport लगातार तीसरे दिन भी पूरी तरह बंद रहा। Abu Dhabi International Airport पर सीमित सेवाएं चल रही हैं। Hamad International Airport भी आंशिक रूप से बंद या सीमित संचालन में रहा। दुबई को दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट हब माना जाता है, ऐसे में वहां का बंद होना वैश्विक नेटवर्क को सीधे प्रभावित कर रहा है।
एमिरेट्स, एतिहाद और कतर एयरवेज ने रोकी सेवाएं
एयरलाइंस कंपनियों पर भी भारी दबाव है। Emirates ने दुबई से आने-जाने वाली उड़ानें सोमवार दोपहर 3 बजे तक निलंबित कर दीं। Etihad Airways ने अबू धाबी की दोपहर 2 बजे तक की सेवाएं रोक दीं। Qatar Airways ने कतर के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान संचालन स्थगित कर दिया। तीनों एयरलाइंस की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से लाखों यात्री प्रभावित हुए हैं।
भारत की उड़ानों पर भी पड़ा असर
इस संकट का असर भारत पर भी साफ दिखा। Air India ने दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दीं। Indira Gandhi International Airport से रविवार को करीब 100 उड़ानें रद्द की गईं। यूरोप और एशिया के बीच कनेक्टिंग फ्लाइट्स बाधित होने से बाली से लेकर फ्रैंकफर्ट तक यात्री फंसे हुए हैं।
जंग थमने के आसार नहीं
मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है। ईरान खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है। संघर्ष लेबनान तक फैल चुका है और बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हवाई हमलों के बाद बड़े हिस्से को ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील कर दिया गया है।
पायलट और क्रू भी फंसे
स्थिति इतनी गंभीर है कि कई पायलट और फ्लाइट क्रू अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। ऐसे में अगर हवाई क्षेत्र खुल भी जाता है, तो सेवाएं तुरंत बहाल करना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अनिश्चितता लंबी चली तो विमानन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और वैश्विक यात्रा व्यवस्था लंबे समय तक अस्थिर रह सकती है।



