ईरान-इजरायल युद्ध ने बढ़ाया वैश्विक तनाव, खाड़ी देशों से लगातार बात कर रहे PM मोदी

मिडिल ईस्ट में 15 देशों तक फैली जंग से बढ़ा वैश्विक तनाव। PM नरेंद्र मोदी ने बहरीन, सऊदी अरब, इजरायल और UAE नेताओं से की बात। CCS की बैठक में भारत की सुरक्षा और रणनीति पर हुई अहम चर्चा।

Indian diplomacy: मिडिल ईस्ट इस वक्त भीषण युद्ध की आग में झुलस रहा है। इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान पर बड़े हमले कर रहे हैं। जवाब में ईरान ने भी इजरायल के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है।

क्या बोले PM मोदी?

इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफ़ा से टेलीफोन पर बात की। इसके अलावा उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से भी बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने दोनों देशों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई को लेकर चिंता जताई। जंग शुरू होने के बाद से ही भारत सरकार लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है।

Indian diplomacy: नेतन्याहू और UAE राष्ट्रपति से भी की बातचीत

रविवार को पीएम मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती दुश्मनी को जल्द खत्म करने और शांति बहाल करने की भारत की अपील दोहराई। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की। पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की निंदा की, जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने वहां रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए यूएई सरकार का आभार भी जताया।

CCS की अहम बैठक

Indian diplomacy: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। इसी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आवास पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक बुलाई। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हुईं। बैठक में ईरान-इजरायल युद्ध और उससे भारत पर पड़ने वाले संभावित असर पर विस्तार से चर्चा की गई। यह साफ है कि मिडिल ईस्ट की इस जंग का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। भारत की नजर हालात पर बनी हुई है और कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता लगातार बढ़ाई जा रही है।

 

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