ग्वालियर के डबरा में भीषण सड़क हादसा, दो दोस्तों की जिंदा जलकर मौत

शादी की खुशियां मातम में बदलीं धमाके के साथ कार बनी आग का गोला एक दोस्त की बची जान, दो दोस्त नहीं बच सके

Gwalior accident: ग्वालियर जिले के डबरा से एक बहुत ही दुखद खबर सामने आई है। यहां नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर बिजली के खंभे से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन टूटकर सीधे कार पर गिर गई। देखते ही देखते पूरी गाड़ी में करंट फैल गया और उसमें भीषण आग लग गई। इस खौफनाक मंजर में कार सवार तीन दोस्तों में से दो की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि एक साथी गंभीर रूप से झुलस गया है।

शादी की खुशियां मातम में बदलीं

ये तीनों दोस्त शिवपुरी के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वे ग्वालियर में एक शादी समारोह का हिस्सा बनकर वापस अपने घर लौट रहे थे। रात के करीब 2 बज रहे थे जब नेशनल हाईवे-44 पर अर्रु तिराहे के पास उनकी स्विफ्ट कार अचानक अनियंत्रित हो गई। रफ्तार तेज होने की वजह से ड्राइवर संतुलन खो बैठा और गाड़ी सीधे सड़क किनारे लगे बिजली के पोल से जा भिड़ी।

Gwalior accident: धमाके के साथ कार बनी आग का गोला

जैसे ही बिजली की लाइन कार पर गिरी, एक जोरदार धमाका हुआ और पूरी गाड़ी आग की लपटों में घिर गई। मंजर इतना डरावना था कि वहां मौजूद लोग चाहकर भी मदद के लिए पास नहीं जा सके। आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया और कार धू-धू कर जलने लगी।

Gwalior accident: एक दोस्त की बची जान, दो दोस्त नहीं बच सके

हादसे के वक्त कार में सवार 29 साल के अविनाश ने हिम्मत दिखाई और खिड़की का कांच तोड़कर बाहर छलांग लगा दी। कूदने की वजह से अविनाश की जान तो बच गई, लेकिन वह बुरी तरह झुलस गया है। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं कार के अंदर फंसे अवधेश और रामजीलाल सोनी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और वे जिंदा जल गए।

सुबह तक जलती रही कार

आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन पर काबू पाना मुश्किल हो गया। बताया जा रहा है कि सुबह तक गाड़ी से धुआं उठता रहा। जब आग पूरी तरह शांत हुई, तब तक कार के अंदर सिर्फ राख और कंकाल ही बचे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अवशेषों को कब्जे में लिया और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

परिवारों में मचा कोहराम

Gwalior accident: इस घटना ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। मृतक अवधेश अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था और उसकी महज चार महीने की छोटी सी बेटी है। वहीं रामजीलाल सोनी के सिर से भी साया उठने के बाद उनकी तीन छोटी बेटियां अनाथ हो गई हैं। जैसे ही खबर घर पहुंची, परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे इलाके में शोक की लहर है।

 

 

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