मस्जिद में गणपति बप्पा मोरया! कभी देखी है ऐसी तस्वीर पाकिस्तान ? ये है हिंदुस्तान.. जानिए कहां और क्यों है ये परंपरा?

सांगली (महाराष्ट्र), 1 सितम्बर। महाराष्ट्र के सांगली जिले का गोटखिंडी गांव इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां गणेशोत्सव के दौरान मस्जिद के भीतर गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। यह अनूठी परंपरा पिछले चार दशकों से लगातार निभाई जा रही है और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर रही है।


बारिश से शुरू हुई थी परंपरा

साल 1980 में भारी बारिश के कारण गणेश प्रतिमा को सुरक्षित रखने की चिंता सामने आई थी। तब मुस्लिम समुदाय ने पहल करते हुए सुझाव दिया कि मूर्ति को मस्जिद के भीतर स्थापित कर दिया जाए, ताकि वह सुरक्षित रह सके। इसी घटना ने इस अनोखी परंपरा को जन्म दिया, जो आज तक जारी है।


दोनों समुदायों की साझा भागीदारी

गांव की आबादी करीब 15,000 है, जिनमें से लगभग 100 परिवार मुस्लिम हैं। गणेशोत्सव के दौरान दोनों समुदाय मिलकर आरती, प्रसाद वितरण और आयोजन की अन्य तैयारियां करते हैं। यह साझेदारी धार्मिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण है।


दंगों में भी कायम रहा भाईचारा

2009 में मिराज में हुए सांप्रदायिक दंगों के समय भी गोटखिंडी गांव ने अपनी अनोखी परंपरा को जारी रखा। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर यह संदेश दिया कि भाईचारा और विश्वास किसी भी तनाव से बड़ा है।


प्रशासन का समर्थन और विश्वास

गणेशोत्सव के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी आयोजन में शामिल होते हैं। इस सहयोग ने गांव में धार्मिक सौहार्द और कानूनी शांति व्यवस्था को और मजबूत किया है।


धार्मिक सद्भाव का अद्भुत प्रतीक

गोटखिंडी गांव की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। मस्जिद में बप्पा की स्थापना यह दर्शाती है कि धर्म की सीमाएं तब टूट जाती हैं जब इंसानियत और भाईचारा सबसे ऊपर होता है।

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