Bangladesh election: अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल, अमेरिका में चेतावनी

बांग्लादेश चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता अमेरिका के कैपिटल हिल पर चेतावनी और लोकतंत्र की कसौटी हिंदू समुदाय और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए वेकअप कॉल

Bangaladesh news: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले अमेरिका के कैपिटल हिल पर ब्रीफिंग हुई, जिसमें अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई। ब्रीफिंग में कांग्रेसनल स्टाफ, पत्रकार, शिक्षाविद और विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के सदस्य शामिल हुए।

 

धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

HinduACTion और Coalition of Hindus of North America (CoHNA) द्वारा आयोजित इस ब्रीफिंग में फॉरेन पॉलिसी एनालिस्ट माइकल रुबिन ने कहा कि धार्मिक आजादी किसी देश के लोकतंत्र की सबसे अहम कसौटी होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश इनटॉलेरेंस में डूब रहा है और इतिहास दोहराने का खतरा बढ़ गया है।

 

1971 का जेनोसाइड और उसकी सीख

रुबिन ने 1971 के जेनोसाइड का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा के पीछे की आइडियोलॉजी को ना हराने पर इतिहास फिर से उभर सकता है। उनका कहना था कि बांग्लादेश के लिए यह समय एक वेकअप कॉल है।

 

चुनाव की वैधता पर सवाल

रिप्रेजेंटेटिव टॉम बैरेट और सुहास सुब्रमण्यम ने हिंदुओं पर बढ़ते हमलों की निंदा की और कहा कि इस हालात में चुनाव को फ्री एंड फेयर नहीं माना जा सकता। सुब्रमण्यम ने अवामी लीग पर बैन को लेकर भी चिंता जताई।

 

नाटक नहीं, असली लोकतंत्र चाहिए

HinduACTion की एडेल नाजेरियन ने कहा, “शांति का मतलब सिर्फ लड़ाई का ना होना नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और ऐसे चुनाव हैं जो केवल नाटक से कहीं ज्यादा हों।” नतीजा: कैपिटल हिल से साफ संदेश गया है अगर मौन रहे तो कीमत बांग्लादेश की अल्पसंख्यकों और क्षेत्रीय स्थिरता को चुकानी पड़ सकती है।

Related Articles

Back to top button